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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का उत्तर प्रदेश गोरखपुर में कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में करेंगी शिरकत

उत्तर प्रदेश गोरखपुर में 30 जून से 1 जुलाई 2025

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उत्तर प्रदेश गोरखपुर में 30 जून से 1 जुलाई 2025 तक भारत की महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू उत्तर प्रदेश के दो प्रमुख शहरों – बरेली और गोरखपुर – के दौरे पर रहीं। यह दौरा न केवल औपचारिकता की दृष्टि से, बल्कि राज्य के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और सांस्कृतिक क्षेत्रों में किए गए नवाचारों और पहलों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के उद्देश्य से भी महत्वपूर्ण रहा।

राष्ट्रपति मुर्मू के कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के लिए राज्य सरकार, केंद्र सरकार के मंत्रिगण, उच्च पदाधिकारी, शैक्षणिक संस्थान, और स्थानीय जनता ने भरपूर तैयारियां की थीं। बरेली में भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) के दीक्षांत समारोह से लेकर गोरखपुर में AIIMS, आयुष विश्वविद्यालय और गोरखनाथ मंदिर तक की यात्रा, सब कुछ राष्ट्रपति की सक्रियता, विकास के प्रति उनके समर्पण और जनसंवाद की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।


पहला दिन: बरेली – शिक्षा और अनुसंधान को प्रोत्साहन

भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) में 11वां दीक्षांत समारोह

बरेली की ऐतिहासिक भूमि पर राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने दौरे की शुरुआत की। वे भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान के 11वें दीक्षांत समारोह की मुख्य अतिथि रहीं। इस संस्थान की वैज्ञानिक उपलब्धियों और अकादमिक उत्कृष्टता ने भारत में पशु चिकित्सा को एक नया आयाम दिया है।

मुख्य अतिथि की गरिमामयी उपस्थिति

समारोह में झारखंड के राज्यपाल और बरेली के मूल निवासी संतोष गंगवार, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, और कृषि राज्य मंत्री भगीरथ चौधरी विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति ने मेधावी छात्रों को डिग्री और स्वर्ण पदक प्रदान किए। उन्होंने संस्थान के छात्रों को प्रोत्साहित करते हुए कहा:

“पशुधन अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, और वैज्ञानिक अनुसंधान से जुड़े आपके प्रयास ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्त्वपूर्ण हैं।”

IVRI की भूमिका और उपलब्धियां

1879 में स्थापित IVRI भारत के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित पशु चिकित्सा संस्थानों में से एक है। इसकी प्रयोगशालाएं, अनुसंधान परियोजनाएं, और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय सहयोग कार्यक्रमों ने भारत को पशुधन उत्पादन, पशु रोग नियंत्रण, और टीका निर्माण में आत्मनिर्भर बनाया है।

पिछले पांच वर्षों में संस्थान द्वारा किए गए अनुसंधान से ब्रुसेलोसिस, एफएमडी और बर्ड फ्लू जैसे रोगों पर प्रभावी नियंत्रण की दिशा में अहम प्रगति हुई है। इसके अलावा, संस्थान ने बायोमेडिकल उपकरणों और जैविक उत्पादों के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य किए हैं।


गोरखपुर की ओर यात्रा: संस्कृति और चिकित्सा का संगम

बरेली में कार्यक्रम संपन्न होने के बाद राष्ट्रपति मुर्मू गोरखपुर के लिए रवाना हुईं। गोरखपुर में उनका स्वागत अत्यंत उत्साह और पारंपरिक सम्मान के साथ किया गया। शहर की गलियों को फूलों और झंडियों से सजाया गया था। जगह-जगह स्वागत द्वार बनाए गए और छात्र-छात्राएं कतारों में राष्ट्रपति के स्वागत के लिए खड़े दिखे।


दूसरा दिन: गोरखपुर – स्वास्थ्य, आयुष और संस्कृति का संगम

1. एम्स गोरखपुर का प्रथम दीक्षांत समारोह

AIIMS गोरखपुर, जो हाल ही में पूर्ण रूप से क्रियाशील हुआ है, ने अपना पहला दीक्षांत समारोह आयोजित किया। राष्ट्रपति ने समारोह की अध्यक्षता करते हुए 200 से अधिक स्नातक और परास्नातक विद्यार्थियों को डिग्रियाँ और पदक प्रदान किए।

AIIMS गोरखपुर की प्रगति

AIIMS गोरखपुर पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और नेपाल सीमा से सटे क्षेत्रों के लिए एक चिकित्सा जीवनरेखा बन चुका है। अस्पताल में उच्च तकनीक सुविधाएं जैसे कार्डियक ICU, कैंसर चिकित्सा, न्यूरोसर्जरी, और 24×7 आपातकालीन सेवाएं चालू हैं।

राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा:

“AIIMS गोरखपुर का यह दीक्षांत समारोह न केवल छात्रों के लिए गौरव का अवसर है, बल्कि यह दर्शाता है कि भारत चिकित्सा शिक्षा और जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है।”


2. महायोगी गुरु गोरक्षनाथ आयुष विश्वविद्यालय का उद्घाटन

1 जुलाई की सुबह राष्ट्रपति मुर्मू ने उत्तर प्रदेश के पहले आयुष विश्वविद्यालय – महायोगी गुरु गोरक्षनाथ आयुष विश्वविद्यालय – का उद्घाटन किया। यह संस्थान आयुर्वेद, योग, यूनानी, होम्योपैथी और प्राकृतिक चिकित्सा को एक ही छत के नीचे लाने वाला भारत का एक अनूठा उदाहरण है।

विश्वविद्यालय की विशेषताएं

  • 200 एकड़ में फैला परिसर

  • अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं और योग कक्ष

  • पंचकर्म और नैचुरोपैथी केंद्र

  • 500 बेड का आयुष सुपरस्पेशलिटी अस्पताल (निर्माणाधीन)

राष्ट्रपति ने कहा:

“भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों का वैश्विक पुनरुत्थान इसी प्रकार के संस्थानों से संभव है। यह विश्वविद्यालय न केवल ज्ञान का केंद्र बनेगा, बल्कि एक सांस्कृतिक दूत के रूप में भी कार्य करेगा।”


3. महायोगी गोरक्षनाथ विश्वविद्यालय, सोनबरसा में नव निर्माण कार्यों का उद्घाटन

राष्ट्रपति ने महायोगी गोरक्षनाथ विश्वविद्यालय के आरोग्यधाम परिसर में शैक्षणिक ब्लॉक, सभागार और पंचकर्म केंद्र का उद्घाटन किया तथा छात्राओं के लिए नए छात्रावास की आधारशिला रखी।

इस परियोजना का सामाजिक महत्व

  • महिला शिक्षा को प्रोत्साहन

  • ग्रामीण छात्रों के लिए आधुनिक शिक्षा अवसंरचना

  • क्षेत्रीय रोजगार सृजन

राष्ट्रपति ने इस अवसर पर कहा:

“शिक्षा और स्वास्थ्य को ग्रामीण भारत तक पहुँचाना आज की सबसे बड़ी चुनौती है। ऐसे संस्थान इस चुनौती को अवसर में बदलने का कार्य कर रहे हैं।”


गोरखनाथ मंदिर में दो दिवसीय आध्यात्मिक प्रवास

राष्ट्रपति ने अपने प्रवास के दोनों दिन गोरखनाथ मंदिर में विशेष दर्शन किए और संतों से आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिर प्रशासन द्वारा उन्हें प्रसाद भेंट किया गया।

गोरखनाथ मंदिर का महत्व

  • 11वीं सदी में स्थापित

  • नाथ सम्प्रदाय का प्रमुख पीठ

  • वर्तमान में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसके महंत हैं

राष्ट्रपति की इस आध्यात्मिक यात्रा ने इस संदेश को सुदृढ़ किया कि धर्म और विकास दोनों साथ चल सकते हैं।


सुरक्षा और प्रशासनिक प्रबंधन

बरेली और गोरखपुर में राष्ट्रपति के आगमन को लेकर प्रशासन पूरी तरह सक्रिय था। लगभग 8000 पुलिसकर्मियों, पैरामिलिट्री फोर्स, बम स्क्वॉड और खुफिया एजेंसियों को तैनात किया गया था।

  • CCTV और ड्रोन निगरानी: प्रमुख स्थानों पर नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए

  • यातायात नियंत्रण: शहर में VIP मूवमेंट के लिए वैकल्पिक मार्ग

  • स्वास्थ्य दल: एम्बुलेंस और मेडिकल स्टाफ की विशेष व्यवस्था

  • मीडिया सेंटर: प्रेस कवरेज के लिए लाइव फीड और प्रेस कॉन्फ्रेंस


जनता और छात्र समुदाय की प्रतिक्रिया

राष्ट्रपति के आगमन को लेकर गोरखपुर और बरेली में खासा उत्साह देखा गया। स्कूली बच्चों ने राष्ट्रपति को पारंपरिक नृत्य और गीतों के माध्यम से स्वागत किया। विश्वविद्यालयों के छात्रों ने राष्ट्रपति के विचारों से प्रेरित होकर शिक्षा में उत्कृष्टता की शपथ ली।


निष्कर्ष: भारत की राष्ट्रपति, राष्ट्र की प्रेरणा

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का यह दौरा औपचारिकताओं से कहीं अधिक था। यह दौरा शिक्षा, चिकित्सा, संस्कृति और आत्मनिर्भरता के समन्वय का आदर्श बन गया। एक ओर उन्होंने उच्च शिक्षा में गुणवत्ता को महत्व दिया, वहीं दूसरी ओर पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देकर भारत की सांस्कृतिक जड़ों को मज़बूत किया।

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