निषाद युवा वाहिनी
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निषाद युवा वाहिनी ने समाज के दबे-कुचले वर्गों को संगठित करने के लिए जन सम्पर्क

संवाददाता गोरखपुर मुकेश साहनी : दिनांक: 31 जुलाई 2025 निषाद समाज के आरक्षण की मांग को लेकर एक बार फिर से आवाज बुलंद हो गई है। निषाद युवा वाहिनी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशिल चन्द साहनी ने समाज के अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन की शुरुआत कर दी है। लखनऊ में आयोजित एक बड़े जनसभा में सुशिल चन्द साहनी ने ऐलान किया कि निषाद समाज को उसका संवैधानिक अधिकार दिलाने के लिए अब यह आंदोलन गाँव-गाँव गली-गली तक ले जाया जाएगा। उन्होंने कहा कि निषाद समाज को अनुसूचित जाति में आरक्षण की गारंटी दिलवाने तक यह संघर्ष जारी रहेगा। सुशिल चन्द साहनी ने स्पष्ट कहा कि समाज के दबे-कुचले वर्गों को संगठित किए बिना यह लड़ाई पूरी नहीं हो सकती। इसी उद्देश्य से निषाद युवा वाहिनी ने व्यापक जनसंपर्क अभियान शुरू किया है। सुशिल चन्द साहनी लगातार विभिन्न जिलों का दौरा कर रहे हैं, गाँवों में सभाएँ कर रहे हैं और समाज को जागरूक कर रहे हैं। उनके अनुसार शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे बुनियादी मुद्दों पर निषाद समाज को समान अधिकार दिलाना ही संगठन का मुख्य उद्देश्य है।

कार्यक्रम में उपस्थित कार्यकर्ताओं और समाज के लोगों ने सुशिल चन्द साहनी का जोरदार स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल निषाद समाज तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन सभी कमजोर वर्गों के लिए भी है, जिन्हें वर्षों से उनका हक नहीं मिल पाया है। सुशिल चन्द साहनी ने कहा, हम केवल नारेबाजी नहीं करेंगे, बल्कि कानूनी और लोकतांत्रिक तरीके से सरकार पर दबाव बनाएंगे। निषाद युवा वाहिनी का यह आंदोलन फिलहाल राज्य के कई जिलों में फैल चुका है। संगठन की योजना है कि आने वाले दिनों में राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा आंदोलन किया जाए। इस दौरान संगठन ने सोशल मीडिया, जनसभाओं और पदयात्राओं के माध्यम से समाज के हर वर्ग तक अपनी बात पहुँचाने का लक्ष्य तय किया है। साहनी का कहना है कि निषाद समाज को जब तक अनुसूचित जाति का दर्जा नहीं मिलेगा, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा।

निषाद युवा वाहिनी

यह एक समाजहितैषी संगठन है जो निषाद समाज और अन्य वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए काम करता है। संगठन का मुख्य उद्देश्य समाज को संगठित करना, शिक्षित करना और अधिकारों के लिए जागरूक करना है। इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशिल चन्द साहनी हैं, जो पिछले कई वर्षों से समाज के लिए आंदोलनरत हैं।

आरक्षण

निषाद समाज लंबे समय से अनुसूचित जाति में आरक्षण की मांग कर रहा है। फिलहाल उन्हें अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) में रखा गया है, लेकिन समाज का कहना है कि उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति अनुसूचित जाति जैसी है। संगठन का मानना है कि अनुसूचित जाति का दर्जा मिलने से निषाद समाज को शिक्षा, सरकारी नौकरियों और अन्य सरकारी योजनाओं में अधिक लाभ मिलेगा।

आंदोलन की अगली रूपरेखा

राज्य के हर जिले में जनसभाएँ और पदयात्राएँ आयोजित की जाएँगी। राजधानी लखनऊ में एक विशाल रैली की तैयारी चल रही है। संगठन कानूनी लड़ाई के लिए वकीलों की टीम भी तैयार कर रहा है।

सुशिल चन्द साहनी का बयान

यह केवल निषाद समाज का आंदोलन नहीं है, यह हर उस परिवार का आंदोलन है जिसे उसका हक नहीं मिला। हम अपने बच्चों के भविष्य के लिए संघर्ष कर रहे हैं। जब तक अनुसूचित जाति का दर्जा नहीं मिलेगा, यह लड़ाई जारी रहेगी।

Source : GT Express Correspondent

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