महाराजा बीर बिक्रम किशोर माणिक्य बहादुर
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महाराजा बीर बिक्रम किशोर माणिक्य बहादुर का जन्म जीवन और योगदान

संपादकः मुकेश साहनी घर तक एक्सप्रेस न्युज। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को त्रिपुरा के महाराजा बीर बिक्रम किशोर माणिक्य बहादुर जी को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि महाराजा बीर बिक्रम किशोर माणिक्य बहादुर न केवल त्रिपुरा के विकास के वास्तुकार थे, बल्कि उन्होंने समाज सेवा, शिक्षा, संस्कृति और गरीबों के सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय योगदान दिया। श्री मोदी ने अपने संदेश में लिखा – “महाराजा बीर बिक्रम किशोर माणिक्य बहादुर जी को उनकी जयंती पर नमन। त्रिपुरा के विकास में उनके अनुकरणीय प्रयासों के लिए उन्हें सराहा जाता है। जनसेवा के प्रति उनका जुनून, गरीबों को सशक्त बनाने की उनकी प्रतिबद्धता और सामाजिक उत्थान के प्रति समर्पण हमें निरंतर प्रेरित करते हैं। केंद्र सरकार और त्रिपुरा सरकार उनके इस सपने को साकार करने के लिए अथक प्रयास कर रही हैं।”

महाराजा बीर बिक्रम किशोर माणिक्य बहादुर (1908–1947) को ‘आधुनिक त्रिपुरा का जनक’ कहा जाता है। उनके शासनकाल में राज्य के विकास की नींव रखी गई। उन्होंने अगरतला में महाराजा बीर बिक्रम कॉलेज, त्रिपुरा हवाई अड्डे और कई शैक्षिक एवं प्रशासनिक संस्थानों की स्थापना की। वे सामाजिक न्याय, जनकल्याण और जनजातीय समुदायों के उत्थान के लिए निरंतर कार्यरत रहे। इतिहासकारों के अनुसार, महाराजा का दृष्टिकोण केवल शहरी विकास तक सीमित नहीं था। उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों तक पहुँचाने का कार्य किया। उनके शासनकाल में त्रिपुरा की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित किया गया। साथ ही, त्रिपुरा को प्रगतिशील दिशा देने के लिए उन्होंने आधुनिक प्रशासनिक ढाँचे की नींव रखी।

19 अगस्त 1908 महाराजा बीर बिक्रम किशोर माणिक्य बहादुर का जन्म 19 अगस्त 1908 को त्रिपुरा के शाही परिवार में हुआ। वे माणिक्य वंश के 184वें शासक थे। बचपन से ही उनमें नेतृत्व और दूरदर्शिता के गुण दिखाई देने लगे थे। आधुनिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने त्रिपुरा को विकास की नई दिशा देने का संकल्प लिया।

1923 से 1947 तक सन् 1923 में उन्होंने गद्दी संभाली और लगभग ढाई दशक तक शासन किया। इस अवधि में उन्होंने प्रशासनिक ढाँचे को आधुनिक स्वरूप दिया। त्रिपुरा में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और संचार सुविधाओं का विस्तार उनके शासनकाल की पहचान बनी। उन्होंने न केवल राजधानी अगरतला का विकास किया बल्कि गाँवों तक योजनाएँ पहुँचाईं।

अगरतला हवाई अड्डे की स्थापना, बीर बिक्रम कॉलेज, त्रिपुरा ट्राइबल सुधार कार्यक्रम उनके प्रमुख योगदानों में अगरतला हवाई अड्डे की स्थापना शामिल है, जिसे आज महाराजा बीर बिक्रम हवाई अड्डे के नाम से जाना जाता है। यह हवाई अड्डा पूर्वोत्तर भारत के सबसे पुराने हवाई अड्डों में से एक है। इसके अलावा, उन्होंने 1947 में महाराजा बीर बिक्रम कॉलेज की स्थापना की, जो आज त्रिपुरा विश्वविद्यालय का प्रमुख अंग है।
महाराजा ने आदिवासी समुदायों के उत्थान के लिए विशेष योजनाएँ बनाईं। ‘त्रिपुरा ट्राइबल सुधार कार्यक्रम’ के तहत उन्होंने शिक्षा और आजीविका को बढ़ावा देने के उपाय किए। वे चाहते थे कि समाज का कोई भी वर्ग पिछड़ा न रह जाए और सभी को समान अवसर मिले।

आधुनिक त्रिपुरा का जनक’ महाराजा बीर बिक्रम को ‘आधुनिक त्रिपुरा का जनक’ कहा जाता है। इसका कारण यह है कि उन्होंने राज्य के विकास को केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि ग्रामीण इलाकों और आदिवासी समाज को मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया। उनकी सोच थी कि विकास तभी सार्थक है जब उसका लाभ अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुँचे।

17 मई 1947 17 मई 1947 को महज 39 की आयु में महाराजा का आकस्मिक निधन हो गया। उनकी असामयिक मृत्यु त्रिपुरा के लिए बड़ी क्षति साबित हुई। किंतु उनके द्वारा शुरू किए गए विकास कार्य और दूरदर्शी नीतियाँ आज भी त्रिपुरा की पहचान बनी हुई हैं। उनके सपनों को साकार करने की दिशा में राज्य और केंद्र सरकारें निरंतर प्रयास कर रही हैं।

Source : PIB | रिपोर्ट : मुकेश साहनी : GT Express न्यूज़ डेस्क | 

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