प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी कार्तिक पूर्णिमा और देव दीपावली की शुभकामनाएं

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को देशवासियों को कार्तिक पूर्णिमा और देव दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने इन पवित्र पर्वों को भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और परंपरा का प्रतीक बताया। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा देश के अपने सभी परिवारजनों को कार्तिक पूर्णिमा और देव दीपावली की कोटि-कोटि शुभकामनाएं। भारतीय संस्कृति और अध्यात्म से जुड़ा यह दिव्य अवसर हर किसी के लिए सुख शांति आरोग्य और सौभाग्य लेकर आए। पावन स्नान दान-पुण्य, आरती और पूजन से जुड़ी हमारी यह पवित्र परंपरा सबके जीवन को प्रकाशित करे। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में यह भी कहा कि कार्तिक पूर्णिमा और देव दीपावली का पर्व हमारे आध्यात्मिक जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो भक्ति, श्रद्धा और सामाजिक एकता का प्रतीक है।
क्या है कार्तिक पूर्णिमा और देव दीपावली का महत्व
कार्तिक पूर्णिमा हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक महीने की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। इसे अत्यंत पवित्र माना गया है। इस दिन गंगा स्नान, दीपदान, दान-पुण्य और भगवान विष्णु की आराधना का विशेष महत्व होता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर का वध किया था इसलिए इसे त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहा जाता है। वहीं देव दीपावली काशी यानी वाराणसी में विशेष रूप से मनाई जाती है। कहा जाता है कि इस दिन देवता स्वयं गंगा तट पर आकर दीप जलाते हैं। पूरा बनारस हजारों दीपों की रोशनी से जगमगा उठता है, गंगा आरती की गूंज से पूरा वातावरण आध्यात्मिक हो जाता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने हमेशा भारतीय परंपराओं और त्यौहारों के महत्व को रेखांकित किया है। उनका यह संदेश देशवासियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि जीवन में सकारात्मकता, स्वच्छता और सामूहिक सद्भाव का भी संदेश देता है।
देशभर में मनाई जा रही भव्य देव दीपावली
देश के कई हिस्सों में आज के दिन विशेष कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। वाराणसी में गंगा घाटों पर लाखों दीपों से आरती की गई। हरिद्वार, प्रयागराज, उज्जैन और नैमिषारण्य में श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान कर दान-पुण्य किया। लोगों ने घरों और मंदिरों में दीप प्रज्वलित कर भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा की। सरकार और प्रशासन ने घाटों पर सुरक्षा और स्वच्छता के विशेष इंतज़ाम किए।
इस पर्व का एक बड़ा पहलू पर्यावरण संरक्षण से भी जुड़ा है। लोग नदियों की सफाई दीपदान और वृक्षारोपण जैसे कार्यों में भाग लेते हैं। प्रधानमंत्री मोदी के स्वच्छ भारत अभियान से जुड़ते हुए कई श्रद्धालु गंगा घाटों की सफाई में सहयोग कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में यह भी कहा कि भारतीय संस्कृति की यह परंपरा न केवल धार्मिक आस्था का उत्सव है, बल्कि यह समाज में प्रकाश, सेवा और सद्भाव का प्रतीक भी है। उन्होंने देशवासियों से आह्वान किया कि इस अवसर पर जरूरतमंदों की मदद करें और समाज में प्रेम व एकता का संदेश फैलाएं।


