कृषि
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कृषि में भारत की बड़ी पहल बीज से लेकर जैविक खेती तक

संवाददाता: मुकेश साहनी, विशेष संवाददाता घर तक एक्सप्रेस | 02अगस्त 2025 कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने बदलते जलवायु परिदृश्य में कृषि को अधिक टिकाऊ और उत्पादक बनाने के लिए जलवायु अनुकूल कृषि में राष्ट्रीय नवाचार (NICRA) नामक प्रमुख नेटवर्क परियोजना शुरू की है। यह परियोजना फसल, पशुधन, बागवानी और मत्स्य पालन पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का गहन अध्ययन करती है और इसके साथ-साथ जलवायु-सहिष्णु प्रौद्योगिकियों का विकास और प्रसार भी करती है। एनआईसीआरए के तहत, आईसीएआर ने अब तक कुल 2,900 किस्में विकसित और जारी की हैं, जिनमें से 2,661 किस्में एक या अधिक जैविक और/या अजैविक तनावों (जैसे सूखा, बाढ़, कीट, रोग, अधिक तापमान) के प्रति सहनशील पाई गई हैं। इन किस्मों का उद्देश्य किसानों को ऐसी फसलें उपलब्ध कराना है जो विपरीत जलवायु परिस्थितियों में भी बेहतर उत्पादन दे सकें।

सरकार, किसानों को पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने के लिए बीज एवं रोपण सामग्री (SMSP) उप-मिशन कार्यान्वित कर रही है। वर्ष 2024-25 में, इस योजना के अंतर्गत 270.90 करोड़ रुपये , जिसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर बीज उत्पादन बढ़ाकर किसानों को समय पर बीज उपलब्ध कराना है | राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन (NMSA) के तहत, सरकार जलवायु परिवर्तन के जोखिमों को कम करने और कृषि को अधिक अनुकूल बनाने के लिए कई योजनाएं चला रही है। “प्रति बूंद अधिक फसल” योजना सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों — जैसे ड्रिप और स्प्रिंकलर — के माध्यम से खेत स्तर पर जल उपयोग दक्षता बढ़ाती है। वर्षा-सिंचित क्षेत्र विकास योजना एकीकृत कृषि प्रणाली (IFS) को बढ़ावा देती है, जो जलवायु परिवर्तनशीलता से जुड़े जोखिमों को कम करती है और उत्पादकता बढ़ाती है।

सॉइल हेल्थ और उर्वरता प्रबंधन

राष्ट्रीय सॉइल हेल्थ एवं उर्वरता प्रबंधन परियोजना के तहत, सॉइल हेल्थ कार्ड (SHC) और सॉइल हेल्थ मैनेजमेंट (SHM) योजनाएं चलाई जा रही हैं। SHC किसानों को उनकी मिट्टी की पोषक स्थिति की विस्तृत जानकारी देता है और फसल उत्पादन के लिए आवश्यक पोषक तत्वों की सही मात्रा और प्रकार की सिफारिश करता है। इससे किसान उर्वरकों का संतुलित उपयोग कर सकते हैं, जिससे लागत घटती है और मिट्टी की सेहत बनी रहती है।

बागवानी कृषि

एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH) के तहत उच्च गुणवत्ता वाली बागवानी फसलों के उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके साथ-साथ कृषि वानिकी और राष्ट्रीय बांस मिशन भी जलवायु अनुकूलन में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। ये कार्यक्रम किसानों को अतिरिक्त आय स्रोत उपलब्ध कराते हैं और पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करते हैं।

जैविक खेती को बढ़ावा

सरकार परम्परागत कृषि विकास योजना (PKVY) और पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए जैविक मूल्य श्रृंखला विकास मिशन (MOVCDNER) के माध्यम से जैविक खेती को प्रोत्साहित कर रही है।

एमओवीसीडीएनईआर योजना केवल पूर्वोत्तर राज्यों में लागू है और प्रति हेक्टेयर 46,500 रुपये (तीन साल में) की सहायता देती है। इसमें किसानों को जैविक इनपुट के लिए 32,500 रुपये प्रति हेक्टेयर मिलते हैं, जिसमें 15,000 रुपये DBT के माध्यम से दिए जाते हैं।

जलवायु अनुकूल कृषि – विस्तृत प्रमुख तथ्य

कार्यक्षेत्र: देशभर के चयनित कृषि विश्वविद्यालय, अनुसंधान केंद्र और किसान क्षेत्र।

संस्था: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR)

भारत में कृषि अनुसंधान और शिक्षा की शीर्ष संस्था।इसमें 100+ अनुसंधान संस्थान और कृषि विज्ञान केंद्र (KVKs) शामिल हैं।NICRA सहित कई परियोजनाओं के माध्यम से राष्ट्रीय और क्षेत्रीय जलवायु चुनौतियों का समाधान करती है।

Source : PIB | रिपोर्ट : मुकेश साहनी : GT Express न्यूज़ डेस्क | AN Next Media Network Private Limited

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