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IEA का बड़ा अलर्ट: 2026 में तेल आपूर्ति संकट और गहरा सकता है, युद्ध के बीच घटेगा वैश्विक उत्पादन

संपादक: Arvind Kumar Sahani |प्रकाशित: 11 सितम्बर 2026, 03:52 अपराह्न
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नई दिल्ली/अंतरराष्ट्रीय डेस्क: अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने 2026 के वैश्विक तेल बाजार को लेकर चिंता बढ़ाने वाला नया अनुमान जारी किया है। एजेंसी के मुताबिक मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और सामान्य तेल प्रवाह की बहाली में देरी के कारण इस साल वैश्विक तेल आपूर्ति में पहले के अनुमान से कहीं बड़ी गिरावट हो सकती है।

IEA के ताजा आकलन के अनुसार 2026 में वैश्विक तेल आपूर्ति में करीब 5.7 मिलियन बैरल प्रतिदिन की कमी आ सकती है, जो पहले अनुमानित करीब 4% गिरावट से अधिक है। एजेंसी ने यह भी कहा है कि वैश्विक तेल मांग में भी गिरावट आने की संभावना है, लेकिन आपूर्ति पर दबाव ज्यादा गंभीर बना हुआ है।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक क्षेत्रीय हमलों और तेल टैंकरों से जुड़े जोखिमों ने कच्चे तेल की कीमतों को करीब 110 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंचा दिया है। अगस्त में वैश्विक तेल भंडार में भी तेज गिरावट दर्ज की गई, जिससे बाजार पर अतिरिक्त दबाव बना है।

भारत पर क्या असर? भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर है। इसलिए लंबे समय तक ऊंची तेल कीमतें पेट्रोल-डीजल की लागत, आयात बिल, रुपये की विनिमय दर और महंगाई पर दबाव डाल सकती हैं। हालांकि घरेलू ईंधन कीमतों पर वास्तविक असर सरकार और तेल कंपनियों के फैसलों तथा अंतरराष्ट्रीय कीमतों की अवधि पर निर्भर करेगा।

IEA ने संकेत दिया है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर करने के लिए मध्य पूर्व में तनाव कम होना और तेल आपूर्ति मार्गों का सामान्य होना महत्वपूर्ण है। मौजूदा स्थिति में बाजार की निगाहें आगे होने वाले भू-राजनीतिक घटनाक्रम और प्रमुख तेल उत्पादक क्षेत्रों से आपूर्ति पर बनी रहेंगी।

यह रिपोर्ट IEA के ताजा बाजार आकलन और Reuters की रिपोर्टिंग पर आधारित है। युद्ध और आपूर्ति से जुड़े आंकड़े बदलते रह सकते हैं।