संपादकः मुकेश साहनी घर तक एक्सप्रेस न्युज। राज्यसभा में आज केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्यमंत्री श्री दुर्गादास उइके ने जानकारी दी कि देशभर के एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों (ईएमआरएस) में छात्रों के स्वास्थ्य, स्वच्छता और समग्र कल्याण सुनिश्चित करने के लिए व्यापक दिशानिर्देश लागू किए गए हैं। उन्होंने यह जानकारी सांसद श्रीमती महुआ माजी के एक अतारांकित प्रश्न का उत्तर देते हुए दी। मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय आदिवासी छात्र शिक्षा समिति जो कि एक स्वायत्त संस्था है, राज्य ईएमआरएस समितियों के सहयोग से इन विद्यालयों का संचालन करती है। इस संस्था ने वित्त वर्ष 2024-25 तक प्रति छात्र प्रति वर्ष ₹1,09,000 आवंटित किया था, जिसे वित्त वर्ष 2025-26 से बढ़ाकर ₹1,47,062 कर दिया गया है। यह राशि छात्रों की शिक्षा, चिकित्सा व्यय, सीबीएसई शुल्क, स्टेशनरी, स्कूल बैग, सैनिटरी नैपकिन और विद्यालयों के संचालन व रखरखाव पर खर्च की जाएगी।
उन्होंने कहा कि छात्रों को स्वस्थ वातावरण में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के लिए विद्यालयों में रसोइयों और मेस सहायकों की नियुक्ति के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग छात्रावासों की व्यवस्था की गई है। इन छात्रावासों में पर्याप्त शौचालय, स्नानघर, सुरक्षित पेयजल, जल निकासी और अपशिष्ट निपटान की सुविधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं। राज्यसभा को बताया गया कि ईएमआरएस में छात्रों की मनोवैज्ञानिक और शारीरिक स्वास्थ्य आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक परामर्शदाता और महिला स्टाफ नर्स नियुक्त की जाती है। इसके अलावा, लड़कियों को मासिक धर्म स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराए जाते हैं। कई राज्यों में छात्रावासों और शौचालयों में वेंडिंग मशीनें और भस्मक (इंसीनरेटर) भी लगाए गए हैं।
एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय (ईएमआरएस) का मुख्य उद्देश्य देश के आदिवासी समुदाय के बच्चों को ऐसी शिक्षा उपलब्ध कराना है, जो न केवल गुणवत्तापूर्ण हो बल्कि उनके समग्र विकास के अवसर भी सुनिश्चित करे। ग्रामीण और दूरदराज़ इलाकों में रहने वाले आदिवासी छात्र प्रायः संसाधनों की कमी के कारण शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। इस अंतर को पाटने के लिए केंद्र सरकार ने यह पहल की। ईएमआरएस में छात्रों को आधुनिक सुविधाओं से युक्त आवासीय व्यवस्था प्रदान की जाती है, जिसमें पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद, कंप्यूटर शिक्षा और सह-पाठ्यचर्या गतिविधियों पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। विद्यालयों का पाठ्यक्रम सीबीएसई बोर्ड से संबद्ध होता है, जिससे छात्रों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगी परीक्षाओं—जैसे जेईई, नीट, यूपीएससी और अन्य प्रवेश परीक्षाओं के लिए तैयार किया जा सके। इन विद्यालयों का विज़न केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि आदिवासी समाज के बच्चों में नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना का विकास करना भी है।
भोजन: पौष्टिक और संतुलित आहार उपलब्ध कराना। आवास: छात्रावासों का रखरखाव, बिजली, पानी और स्वच्छता सुविधाएँ।
अन्य कल्याणकारी सुविधाएँ: स्कूल बैग, यूनिफॉर्म, जूते-मोजे और स्वच्छता संबंधी सामग्री। इस वित्तीय व्यवस्था का लक्ष्य केवल पढ़ाई कराना नहीं है, बल्कि छात्रों को सुरक्षित, स्वस्थ और प्रेरणादायी माहौल में पढ़ाई का अवसर देना है। ईएमआरएस की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ छात्र-छात्राओं को केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि जीवन जीने के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाएँ भी व्यवस्थित रूप से उपलब्ध कराई जाती हैं। अलग छात्रावास: लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग छात्रावास बनाए गए हैं, ताकि सुरक्षा, गोपनीयता और सुविधा सुनिश्चित हो सके। इन छात्रावासों में पर्याप्त कमरे, स्वच्छ शौचालय, स्नानघर और भोजनशाला की व्यवस्था होती है।
महिला स्टाफ नर्स और परामर्शदाता: प्रत्येक विद्यालय में एक योग्य परामर्शदाता और महिला स्टाफ नर्स नियुक्त की जाती है। यह व्यवस्था न केवल छात्रों के शारीरिक स्वास्थ्य का ध्यान रखती है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन और परामर्श सेवाएँ भी प्रदान करती है। सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन और भस्मक: लड़कियों की सुविधा के लिए हॉस्टलों और शौचालयों में सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीनें और इंसीनरेटर (भस्मक) लगाए जाते हैं। इससे छात्राओं को मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता और गरिमा बनाए रखने में मदद मिलती है। पौष्टिक भोजन: विद्यालयों में नियुक्त रसोइये और मेस सहायक यह सुनिश्चित करते हैं कि सभी बच्चों को प्रतिदिन पौष्टिक और संतुलित आहार मिले। भोजन की गुणवत्ता पर नियमित निगरानी रखी जाती है, ताकि किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो।
Source : PIB | रिपोर्ट : मुकेश साहनी : GT Express न्यूज़ डेस्क |
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