स्वास्थ्य केंद्र
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महुआ डाबर गंगराई टोला में स्वस्थ केंद्र तक पहुंच संकट में कुशीनगर

कुशीनगर संवादाताः मुकेश साहनी‚घर तक एक्सप्रेस। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का सीधा संबंध आधारभूत अवसंरचना, विशेषकर संपर्क मार्गों की गुणवत्ता से होता है। कुशीनगर जिले के महुआ डाबर गंगराई टोला में स्थित स्वास्थ्य केंद्र केंद्र एक केंद्रीय चिकित्सा सहायता बिंदु है, लेकिन सड़क की असार हालत और सुनसान परिवेश के कारण यह सेवा वहां के निवासियों के लिए असुविधाजनक और जोखिमपूर्ण बन गई है।

सड़क की दुर्दशा की तस्वीर

महुआ डाबर गंगराई टोला स्वस्थ केंद्र से जुड़े मुख्य मार्ग की हालत बेहद खराब है — गड्ढों और जलभराव से भरी सड़क पैदल चलने वालों और दोपहिया वाहन वालों दोनों के लिए परेशानी । बारिश के मौसम में यह मार्ग कीचड़ और दलदल में तब्दील हो जाता है, जिससे वाहनों का आना-जाना लगभग असंभव हो जाता है। विशेषकर गर्भवती महिलाएं, बुज़ुर्ग और बीमार मरीज स्वास्थ्य केंद्र तक पहुँचने के लिए कई किलोमीटर पैदल पथ से गुजरने को मजबूर हैं।

सुनसान स्वास्थ्य केंद्र और अनुपस्थिति का प्रभाव

सड़क की खराब स्थिति के कारण स्वस्थ केंद्र पर मरीज काफी कम हो गया है। दिन में विशेषकर दोपहर के बाद यह केंद्र सुनसान हो जाता है, जिससे बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं की नियमित फ़ॉलो‑अप और टीकाकरण जैसी जरूरी सेवाओं में बाधा आती है। ग्रामीणों ने बताया कि अतीत में अक्सर स्वास्थ्य केंद्र पर कोई न कोई आने‑जाने में असमर्थता के कारण बंद पड़ा रहता है, जिससे लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित होना पड़ता है।

स्थानीयों की आपबीती और प्रशासन की लापरवाही

स्थानीय निवासी—विशेषकर महिलाएं—व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए कहते हैं कि “एक बार गर्भवती भ्रूण जांच के लिए जाना पड़ा, लेकिन गाड़ी की हालत ठीक नहीं थी। अंततः हमें स्थानीय किसान की सहायता लेनी पड़ी जो अपनी ठेस-ठहाके से भरी टरैक्टर गाड़ी से हमें अस्पताल पहुँचाया।” ग्रामीणों का आरोप है कि विकास खंड या ग्राम पंचायत द्वारा इस मार्ग पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है, जिससे स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।

महुआ डाबर गंगराई टोला, कुशीनगर (उत्तर प्रदेश)
कुशीनगर जनपद के एक ग्रामीण और सीमांत क्षेत्र महुआ डाबर गंगराई टोला की भौगोलिक स्थिति पूर्वी उत्तर प्रदेश के सामाजिक‑आर्थिक रूप से पिछड़े इलाकों में आती है। यहाँ की बड़ी जनसंख्या कृषि, दैनिक श्रम और मनरेगा जैसे कार्यक्रमों पर निर्भर है। क्षेत्र की मूलभूत अवसंरचना – खासकर स्वास्थ्य, सड़क, शिक्षा और जल निकासी – दशकों से उपेक्षित है। यह टोला जिले के अन्य भागों से भौगोलिक रूप से कटा हुआ रहता है, विशेषकर मानसून के मौसम में।

स्वास्थ्य केंद्र तक सड़क का खराब होना और सुनसान माहौल
महुआ डाबर गंगराई टोला में स्थित सहायक नर्सिंग मिडवाइफरी स्वस्थ केंद्र क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं का एकमात्र प्राथमिक केंद्र है, लेकिन इस केंद्र तक पहुँचने वाली सड़क की स्थिति जर्जर और खतरनाक है। जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे, जलभराव और कीचड़ के कारण यह सड़क आमजन के लिए दुर्गम बन चुकी है। इसके परिणामस्वरूप यह केंद्र दिनभर सुनसान पड़ा रहता है, जहाँ आवश्यक टीकाकरण, प्रसव पूर्व देखभाल और सामान्य चिकित्सा सुविधाएं प्रभावित हो रही हैं।

गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग, बीमार मरीज
इस दुर्दशा से सबसे अधिक प्रभावित वे लोग हैं जो समाज के सबसे संवेदनशील वर्गों में आते हैं—गर्भवती महिलाएं, नवजात शिशु, वृद्धजन और बीमार व्यक्ति। गर्भवती महिलाओं को प्रसव से पूर्व नियमित जाँच और देखभाल के लिए केंद्र तक आना होता है, लेकिन खराब रास्ते के चलते वे यह सुविधा प्राप्त नहीं कर पातीं। बुजुर्ग और बीमार लोगों के लिए अस्पताल तक पहुँचना जोखिमभरा और तकलीफदेह है। इसके अलावा, आपातकालीन चिकित्सा की स्थिति में कोई भी वाहन समय पर नहीं पहुँच पाता।

पैदल लंबी दूरी, वाहन पहुंच में कमी, स्वास्थ्य सेवा से वंचित
स्थानीय ग्रामीणों की शिकायतें वर्षों पुरानी हैं, लेकिन समाधान की दिशा में ठोस प्रयास अब तक नहीं हो पाया है। लोग बताते हैं कि ANM केंद्र तक पहुँचने के लिए उन्हें कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। महिला रोगियों को इस यात्रा में विशेष कठिनाई होती है। मोटर साइकिल या चार पहिया वाहन की पहुंच न हो पाने के कारण मरीजों को कंधों पर या ठेले से ले जाना पड़ता है। बहुत बार मरीज समय पर स्वास्थ्य केंद्र तक पहुँच ही नहीं पाते, जिससे चिकित्सा सेवाओं से वंचित रह जाते हैं।

सड़क का प्राथमिक मरम्मत, जलनिकासी प्रणाली, सुगम यातायात
ग्रामीणों की प्रमुख माँग है कि स्वस्थ केंद्र तक पहुँचने वाली मुख्य सड़क की तत्काल मरम्मत की जाए। साथ ही, सड़क किनारे जलनिकासी की उचित व्यवस्था की जाए ताकि बारिश में पानी जमा न हो। लोगों का कहना है कि अगर सड़क को सुदृढ़ कर दिया जाए तो स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ शिक्षा, राशन वितरण और अन्य बुनियादी सुविधाएं भी बेहतर तरीके से लोगों तक पहुँच सकेंगी। इसके अलावा, एंबुलेंस जैसी आवश्यक सेवाओं को भी निर्बाध रूप से सुगम बनाया जा सकेगा।

रिपोर्ट : मुकेश साहनी : GT Express न्यूज़ डेस्क | AN Next Media Network Private Limited

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