भूमिका: रेगिस्तान से हरियाली तक का सफर
राजस्थान – भारत का सबसे बड़ा राज्य, जिसे सदियों से उसकी वीरगाथाओं, राजसी किलों और थार के विस्तृत रेगिस्तान के लिए जाना जाता है – अब पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक नई क्रांति की ओर अग्रसर है। जहाँ पहले तपती रेत और शुष्क हवाएं राज्य की पहचान थीं, वहीं अब हरियाली, छायादार वृक्ष और पर्यावरणीय जागरूकता इसकी नई पहचान बनती जा रही है।
यह परिवर्तन यूं ही नहीं आया। इसके पीछे है राज्य सरकार की पर्यावरणीय दूरदृष्टि, व्यापक योजनाएं और जनसहभागिता पर आधारित अभियान, जिनमें सबसे उल्लेखनीय है – “हरियालो राजस्थान” अभियान।
“हरियालो राजस्थान” की शुरुआत: संकल्प और सोच
राज्य के मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने इस व्यापक हरित आंदोलन की शुरुआत की, यह कहते हुए कि:
“राजस्थान का भविष्य केवल इमारतों से नहीं, पेड़ों से भी लिखा जाएगा। हमें रेत को हरियाली में बदलना है।”
यह बयान केवल एक राजनीतिक वक्तव्य नहीं, बल्कि एक दूरगामी सोच का संकेत था – एक ऐसा प्रयास जिसमें विकास और पर्यावरण के सहअस्तित्व को प्रमुखता दी गई।
मुख्य उद्देश्य और रणनीति
“हरियालो राजस्थान” केवल वृक्षारोपण का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक जनांदोलन है जिसमें सरकारी विभाग, निजी संस्थाएं, शैक्षणिक संस्थान, स्वयंसेवी संगठन और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है।
प्रमुख उद्देश्य:
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हर जिले में वृक्षारोपण हेतु वार्षिक लक्ष्य तय करना
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स्थानीय और पारिस्थितिकीय अनुकूल पौधों का चयन
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पौधों की देखभाल हेतु जिम्मेदार “ग्रीन वॉलंटियर्स” की नियुक्ति
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जल संरक्षण और भूमि क्षरण रोकने के लिए वृक्ष आधारित उपाय
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स्कूलों-कॉलेजों में पर्यावरण शिक्षा का प्रचार-प्रसार
गृह रक्षा विभाग की भूमिका: सुरक्षा से सेवा तक
राज्य के गृह रक्षा विभाग ने इस अभियान में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जहाँ आमतौर पर इस विभाग का कार्य आपदा प्रबंधन और आंतरिक सुरक्षा से जुड़ा होता है, वहीं अब यह विभाग पर्यावरण संरक्षण में भी अग्रणी बन गया है।
27 जून 2025 को जयपुर में गृह रक्षा प्रशिक्षण केंद्र में एक भव्य वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें 200 से अधिक पौधे लगाए गए। इस आयोजन में महानिदेशक श्रीमती मालिनी अग्रवाल और सैकड़ों गृह रक्षकों ने भाग लिया।
उनका कथन था:
“वृक्ष लगाना मात्र क्रिया नहीं, यह संस्कार है। हर पौधा एक ऋण चुकाने जैसा है – जो हमने धरती से लिया, वह अब लौटाने का समय है।”
वृक्षों का चयन: प्रकृति के अनुरूप योजना
राजस्थान की कठोर जलवायु को ध्यान में रखते हुए, वृक्षारोपण में ऐसे पौधों को प्राथमिकता दी गई है जो कम पानी में भी जीवित रह सकें, छाया दें, औषधीय गुण हों और स्थानीय जैव विविधता को समर्थन दें।
वृक्ष का नाम | विशेषता |
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नीम | औषधीय, छायादार, बैक्टीरिया रोधी |
पीपल | उच्च ऑक्सीजन उत्पादन, धार्मिक महत्त्व |
करंज | नाइट्रोजन फिक्सिंग, खेती के लिए उपयोगी |
गुलमोहर | सजावटी, गर्मी में छायादार फूल |
कचनार | सुंदर फूलों वाला, मधुमक्खियों के लिए लाभकारी |
वैज्ञानिक आधार: केवल सौंदर्य नहीं, जीवन रक्षक उपाय
राजस्थान में औसत वर्षा कम, तापमान अधिक और जल स्रोत सीमित हैं। ऐसे में वृक्षारोपण एक वैज्ञानिक समाधान बनकर उभरा है।
प्रमुख लाभ:
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कार्बन अवशोषण: वृक्ष CO₂ को सोखते हैं और ग्लोबल वार्मिंग से लड़ते हैं।
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मृदा संरक्षण: जड़ें मिट्टी को पकड़कर भूमि कटाव रोकती हैं।
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जल संतुलन: वृक्ष वर्षा चक्र को नियमित करते हैं।
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जैव विविधता: कई पक्षी, कीट और जीव वृक्षों में आश्रय पाते हैं।
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हवा की गुणवत्ता: नीम, पीपल जैसे पेड़ वायु को शुद्ध करते हैं।
जनभागीदारी: हरियाली को जनांदोलन बनाना
राज्य सरकार और गृह रक्षा विभाग ने इस अभियान को केवल सरकारी दायरे में सीमित नहीं रखा, बल्कि आम जनता को जोड़ने के लिए ठोस कदम उठाए।
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स्कूल-कॉलेजों में “पर्यावरण क्लब” की स्थापना
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युवाओं और महिला मंडलों की सक्रिय भागीदारी
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NGO और CSR कंपनियों को वृक्षारोपण में भागीदार बनाना
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“एक पौधा एक कर्मी” जैसी योजनाएं
लक्ष्य 2030: दीर्घकालिक योजना
राज्य सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक “हरियालो राजस्थान” को मिशन मोड में चलाया जाए।
लक्ष्य | विवरण |
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2 लाख पौधे/वर्ष | प्रत्येक जिले में 5000 पौधों का रोपण |
ग्रीन सेल | जिले स्तर पर निगरानी और रिपोर्टिंग |
GIS ट्रैकिंग | पौधों की डिजिटल निगरानी |
जल स्रोत पुनर्जीवन | वृक्षों से जुड़ी जल संरक्षण योजनाएं |
जलवायु परिवर्तन से मुकाबला: राजस्थान की नई पहचान
राजस्थान जैसे राज्य, जो जलवायु परिवर्तन से सर्वाधिक प्रभावित हैं, के लिए यह अभियान एक रक्षा कवच की तरह काम कर रहा है।
पिछले दो दशकों में:
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औसत तापमान में 1.8°C की वृद्धि
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वर्षा में 30% तक की गिरावट
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12 से अधिक जिले सूखे की चपेट में
“हरियालो राजस्थान” ऐसे स्थानीय समाधान प्रस्तुत करता है जो वैश्विक पर्यावरणीय एजेंसियों द्वारा भी सराहे गए हैं।
अंतरराष्ट्रीय सराहना
UNEP (संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम) ने इस अभियान को “स्थानीय स्तर पर जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए एक अनुकरणीय मॉडल” बताया है।
📰 न्यूज़ :
जयपुर, राजस्थान | विशेष संवाददाता
राजस्थान—जिसे सदियों से थार के रेगिस्तान, वीरता और सांस्कृतिक धरोहरों के लिए जाना जाता है—अब हरियाली के नए अध्याय की ओर अग्रसर है। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा द्वारा शुरू किया गया पर्यावरणीय अभियान “हरियालो राजस्थान” अब न केवल राज्य की पहचान बदल रहा है, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक स्थायी विरासत भी रच रहा है।
27 जून 2025 को गृह रक्षा प्रशिक्षण केंद्र, जयपुर में हुए वृक्षारोपण कार्यक्रम ने इस अभियान को नई ऊर्जा दी। गृह रक्षा विभाग की महानिदेशक श्रीमती मालिनी अग्रवाल के नेतृत्व में 200 से अधिक पौधे लगाए गए, जिसमें अधिकारी, कर्मचारी और सैकड़ों गृह रक्षक स्वयंसेवकों ने भाग लिया।
मालिनी अग्रवाल ने कहा:
“वृक्ष लगाना मात्र क्रिया नहीं, यह एक संस्कार है। हम केवल सुरक्षा नहीं देते, हम प्रकृति की रक्षा भी करते हैं।”
🌱 “हरियालो राजस्थान” की विशेषताएं:
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हर जिले में वृक्षारोपण के लिए लक्ष्य निर्धारण
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स्थानीय पौधों की प्राथमिकता (नीम, पीपल, गुलमोहर, करंज आदि)
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ग्रीन वॉलंटियर्स टीम का गठन
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स्कूलों, एनजीओ और महिला मंडलों की भागीदारी
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जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध स्थानीय समाधान
🛡️ गृह रक्षा विभाग की पहल:
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300 स्थानों पर वृक्षारोपण शिविरों की योजना
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“एक पौधा एक रक्षा कर्मी” योजना की शुरुआत
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वर्षा जल संचयन, सौर ऊर्जा उपयोग और प्लास्टिक मुक्त परिसर पर बल
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सभी कार्यालयों में “ग्रीन कॉर्नर” स्थापित करने का निर्देश
📢 प्रेरक कथन:
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रविंद्र सिंह (गृह रक्षक): “हर पौधा हमारे भविष्य की नींव है।”
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सरिता मीणा (महिला गृह रक्षक): “जो पेड़ आज लगाया है, वही कल मेरे बच्चों की छाया बनेगा।”
🌍 2030 तक के लक्ष्य:
लक्ष्य | विवरण |
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हर जिले में 5000 पौधे | कुल 2 लाख पौधे प्रतिवर्ष |
ग्रीन सेल | विभागीय समन्वय हेतु |
CSR सहभागिता | निजी कंपनियों को जोड़ना |
स्कूलों में ‘पर्यावरण क्लब’ | हरियाली की शिक्षा |
🌐 वैश्विक मान्यता:
UNEP ने “हरियालो राजस्थान” अभियान को स्थानीय जलवायु समाधान का अनुकरणीय उदाहरण बताया है
✅ निष्कर्ष:
राजस्थान की बदलती जलवायु और घटते जल स्रोतों की पृष्ठभूमि में “हरियालो राजस्थान” केवल एक अभियान नहीं, बल्कि एक जनांदोलन बन चुका है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और गृह रक्षा विभाग के नेतृत्व में यह पहल राज्य को मरुस्थल से हरित क्षेत्र की दिशा में ले जा रही है।
हर नागरिक, हर पौधा—इस मंत्र को आत्मसात कर ही राजस्थान को वास्तव में “हरियालो” बनाया जा सकता है। यह एक आम नागरिक की भागीदारी से शुरू होकर, एक हरित राज्य के रूप में भारत की अगुवाई कर सकता है।