भटहट-बासथान -मलनथान फोरलेन
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भटहट-बासथान -मलनथान फोरलेन पर लापरवाही का नतीजा, रोज़ाना हादसों से दहशत में लोग

संपादकः मुकेश साहनी घर तक एक्सप्रेस न्युज। गोरखपुर जनपद के गुलहरिया थाना क्षेत्र अन्तर्गत भटहट से बासथान (मलनथान) को जोड़ने वाले फोरलेन मार्ग पर स्थित तर्कुल्ही चौराहे पर दुर्घटनाओं का सिलसिला लगातार बढ़ता जा रहा है। चौराहे पर सड़क किनारे बनाई गई नाली को निर्माण के बाद खुले छोड़ दिए जाने के कारण आए दिन वाहन फिसलकर उसमें गिर जाते हैं। कई बार तो लोग गंभीर रूप से घायल भी हुए हैं, जबकि कुछ हादसों में मौतें भी दर्ज की गई हैं। बावजूद इसके, अब तक जिम्मेदार विभाग ने इस समस्या का समाधान करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नाली को ढकने या सुरक्षित करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है। रात के समय कम रोशनी और ट्रैफिक के दबाव के कारण चालक अक्सर वाहन से नियंत्रण खो बैठते हैं और नाली में गिर जाते हैं। इससे न केवल जानमाल का नुकसान हो रहा है बल्कि इस मार्ग से होकर गुजरने वाले यात्रियों में भय का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों ने कई बार विभागीय अधिकारियों को लिखित और मौखिक शिकायतें दीं, लेकिन अभी तक केवल आश्वासन ही मिला है।

भटहट,बासथान, मलनथान से जुड़ने वाला मार्ग एक महत्वपूर्ण बिंदु है, जहाँ से प्रतिदिन हजारों वाहन गुजरते हैं। भारी वाहनों, स्कूली बसों और आम सवारी गाड़ियों का दबाव लगातार बना रहता है। ऐसे में यह खुली नाली यात्रियों और वाहन चालकों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है। स्थानीय का कहना है कि यदि शीघ्र ही नाली को ढकने, उचित साइनबोर्ड लगाने और स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था नहीं की गई तो हादसों की संख्या और बढ़ सकती है। स्थानीय निवासी छोटेलाल ने बताया, “हम लोग हर दिन इसी चौराहे से गुजरते हैं। अब तो बच्चों को स्कूल भेजने से भी डर लगने लगा है। हादसों का आलम यह है कि हर हफ्ते कोई न कोई वाहन इस नाली में फंसता है। कई बार तो छोटे बच्चे और बुजुर्ग राह चलते गिर चुके हैं।” वहीं दूसरी ओर दुकानदारों का कहना है कि दुर्घटनाओं के कारण व्यापार पर भी असर पड़ रहा है। लोग सुरक्षित मार्ग तलाश कर वैकल्पिक रास्ता चुनने लगे हैं।

  1. नाली को शीघ्र ढकने की व्यवस्था की जाए
    स्थानीय निवासियों का सबसे बड़ा और प्राथमिक आग्रह यही है कि सड़क किनारे बनी इस नाली को तत्काल ढकने की व्यवस्था की जाए। खुले नाले के कारण आए दिन वाहन, पैदल यात्री और दोपहिया चालक हादसों का शिकार हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस नाली को मजबूत ढक्कन या स्लैब से ढक दिया जाए तो दुर्घटनाओं की संभावना काफी हद तक कम हो जाएगी। कई बार शिकायतों के बावजूद अब तक केवल आश्वासन मिला है, परंतु कार्यवाही नहीं हुई है। लोगों का मानना है कि यह काम जितना विलंबित होगा, उतना ही अधिक जानमाल का नुकसान होता रहेगा।
  2. चौराहे पर पर्याप्त स्ट्रीट लाइट लगाई जाए
    तर्कुल्ही चौराहे का एक और गंभीर मुद्दा रोशनी की कमी है। रात में अंधेरा छा जाने पर वाहन चालकों को न तो सड़क का किनारा साफ दिखता है और न ही खुली नाली का अंदाज़ा लग पाता है। इस वजह से अधिकांश हादसे अंधेरे में होते हैं। स्थानीय लोगों की मांग है कि चौराहे और उसके आसपास सौर ऊर्जा या हाई मास्ट स्ट्रीट लाइट्स लगाई जाएं ताकि दिन और रात दोनों समय साफ दृश्यता बनी रहे। उनका कहना है कि यदि रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था हो जाएगी तो दुर्घटनाओं की संभावना आधी रह जाएगी।
  3. हादसों से बचाव के लिए चेतावनी बोर्ड और डिवाइडर लगाए जाएं
    ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि तर्कुल्ही चौराहे पर वाहन रफ्तार से गुजरते हैं और अचानक सामने खुला नाला या गड्ढा आ जाने पर वे नियंत्रण खो बैठते हैं। यदि यहाँ पर उचित जगहों पर चमकीले और प्रतिबिंबित (रिफ्लेक्टर युक्त) चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं तो चालकों को पहले से सावधानी बरतने का अवसर मिलेगा। साथ ही सड़क के बीच डिवाइडर लगाए जाने से ट्रैफिक का प्रवाह नियंत्रित होगा और आमने-सामने की टक्कर की घटनाएँ भी कम होंगी।
  4. पुलिस और ट्रैफिक विभाग को मिलकर नियमित निगरानी करनी चाहिए
    स्थानीय लोगों ने यह भी मांग की है कि इस चौराहे पर नियमित रूप से ट्रैफिक पुलिस की तैनाती की जाए। फिलहाल यहाँ पुलिस की मौजूदगी न के बराबर रहती है, जिसके कारण वाहन चालक बेधड़क तेज़ रफ्तार में आते-जाते हैं। यदि पुलिस और ट्रैफिक विभाग की संयुक्त गश्त और चौकसी बढ़ा दी जाए तो न केवल वाहनों की गति पर नियंत्रण होगा बल्कि दुर्घटना के बाद राहत कार्य भी तुरंत शुरू हो सकेगा। इसके अलावा लोगों का कहना है कि ट्रैफिक विभाग समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाकर आसपास के वाहन चालकों को सुरक्षा नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित करे।

 रिपोर्ट : मुकेश साहनी : GT Express न्यूज़ डेस्क | 

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