गोरखपुर की सविता देवी का छठ पर्व संदेश हुआ वायरल महिलाओं ने कहा मां बेटी और प्रकृति के बीच अटूट संवाद

भारत की लोक संस्कृति में छठ महापर्व का स्थान अत्यंत पवित्र और विशिष्ट है। यह पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति और मानव के गहरे रिश्ते का उत्सव है। इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए मशहूर वीडियो मेकर सविता देवी ने अपने डिजिटल प्लेटफार्म से देश और विदेश में बसे सभी श्रद्धालुओं को छठ महापर्व की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि छठ माता की उपासना भारतीय नारी की असाधारण शक्ति, धैर्य और श्रद्धा का प्रतीक है। यह पर्व सूर्य देव की आराधना के साथ-साथ जल, वायु और पृथ्वी के प्रति सम्मान का संदेश देता है। सविता देवी, जो भोजपुरी क्षेत्र की प्रसिद्ध कंटेंट क्रिएटर और सामाजिक वीडियो निर्माता के रूप में जानी जाती हैं, ने इस अवसर पर कहा कि डिजिटल युग में भी लोक संस्कृति का संरक्षण हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने अपने वीडियो संदेश में यह भी जोड़ा कि छठ पर्व हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति वही है जो समाज और प्रकृति दोनों के प्रति समर्पण भाव से की जाए।

सविता देवी ने अपने संदेश में कहा, “छठ पूजा में जब महिलाएं नदी, तालाब या घाट पर निर्जल उपवास रखकर सूर्य को अर्घ्य देती हैं, तब वे केवल अपने परिवार की सुख-समृद्धि के लिए नहीं, बल्कि समाज और समूची प्रकृति के कल्याण की कामना करती हैं।” उन्होंने बताया कि यह पर्व आत्मसंयम, शुचिता और त्याग की मिसाल है। उन्होंने लोगों से अपील की कि इस छठ पर्व पर सभी लोग नदी, तालाब और घाटों की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। प्लास्टिक और गंदगी से बचें, क्योंकि छठ माता की पूजा का असली अर्थ है स्वच्छता, शुद्धता और संतुलन। उन्होंने कहा कि जब हमारी नदियाँ स्वच्छ रहेंगी, तभी सूर्य उपासना का वास्तविक महत्व साकार होगा।
सविता देवी ने अपने वीडियो संदेश में भोजपुरी और हिंदी दोनों भाषाओं में जनता से संवाद किया। उन्होंने अपने विशेष श्रृंखला “लोक से जुड़ो” के तहत एक नया वीडियो जारी किया, जिसमें छठ पर्व की परंपराओं, गीतों और पर्यावरणीय महत्व को खूबसूरती से प्रस्तुत किया गया है। वीडियो में उन्होंने ग्रामीण महिलाओं की तैयारियाँ, घाट सजाने की प्रक्रिया, कांस के फूलों की सुंदरता और लोकगीतों की मधुरता को कैमरे में कैद किया। उन्होंने कहा कि हमारी युवा पीढ़ी को इन परंपराओं से जोड़ना जरूरी है। “आज सोशल मीडिया के युग में जब हर त्योहार ग्लैमरस तरीके से दिखाया जाता है, तब हमें अपनी मिट्टी और संस्कृति से जुड़ी सरलता और पवित्रता को भी उतनी ही प्रमुखता देनी चाहिए,” सविता ने कहा। उनका मानना है कि वीडियो निर्माण सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि संस्कृति संरक्षण का एक आधुनिक माध्यम बन चुका है।

गोरखपुर और आसपास के इलाकों में सविता देवी के वीडियो को भारी सराहना मिली है। यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर अपलोड किए गए उनके संदेश को अब तक लाखों लोगों ने देखा और साझा किया है। कई स्थानीय महिलाएँ कहती हैं कि सविता देवी ने उनके दिल की बात कही है — क्योंकि छठ केवल एक पर्व नहीं, बल्कि “मां, बेटी और प्रकृति के बीच अटूट संवाद” है। उनके इस वीडियो संदेश में संगीत की पृष्ठभूमि में पारंपरिक छठ गीत “केतना सोना लागे छठी मईया के घाट” गूंजता है, जो दर्शकों को भावविभोर कर देता है। सविता देवी ने अपने संदेश का समापन करते हुए कहा — “छठ माता सभी के जीवन में प्रकाश, ऊर्जा और संतुलन लाएँ। हम सब मिलकर अपने पर्यावरण को स्वच्छ रखें, अपनी परंपराओं को सहेजें और समाज में प्रेम, सम्मान और समानता का संदेश फैलाएँ।”


