गोरखपुर में बारिश के साथ ओलावृष्टि ने मचाई तबाही, फसलों और संपत्ति को भारी नुकसान
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश —
सोमवार को गोरखपुर और आस-पास के क्षेत्रों में हुई तेज बारिश के साथ लंबे समय तक ओलावृष्टि होने से इलाके में भारी नुकसान हुआ है। ग्रामीण इलाकों में खड़ी फसलों पर कहर टूट पड़ा, जबकि कई मकानों की छतें और टीन शेड बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। स्थानीय प्रशासन ने नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है।
तेज बारिश के साथ लगातार ओलावृष्टि
सुबह से ही आसमान में काले बादल छाए हुए थे, और दोपहर करीब 3 बजे तेज बारिश शुरू हुई। बारिश के साथ ही अचानक बड़े आकार के ओले गिरने लगे जो करीब 20 से 30 मिनट तक रुक-रुक कर गिरते रहे। खेतों में खड़ी धान, मक्का, सब्जी और फलदार पौधों को भारी नुकसान पहुंचा।
किसानों की मेहनत पर पानी फिरा
ओलों की मार सबसे अधिक बांसगांव, पिपराइच, कौड़ीराम, चौरीचौरा और सहजनवां क्षेत्रों के किसानों पर पड़ी। एक किसान रामआसरे ने बताया, “चार महीने की मेहनत आज बर्बाद हो गई। मक्के की फसल पूरी तरह गिर चुकी है और पत्तियां ओलों से कट गई हैं।”
मकानों और दुकानों को भी नुकसान
शीशों तक को नुकसान पहुंचा। रेलवे स्टेशन परिसर और मेडिकल कॉलेज रोड पर कई दुकानों के बोर्ड उखड़ गए।
स्कूलों में छुट्टी, ट्रैफिक बाधित
तेज बारिश और ओले गिरने के कारण कई स्कूलों ने अचानक छुट्टी घोषित कर दी। शहर की सड़कों पर जलभराव के कारण ट्रैफिक घंटों बाधित रहा। कुछ जगहों पर बिजली के खंभे गिर गए, जिससे बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई।
प्रशासन ने शुरू किया राहत कार्य
जिलाधिकारी ने मीडिया को जानकारी दी कि नुकसान का सर्वेक्षण प्रारंभ कर दिया गया है और प्रभावित किसानों को जल्द ही मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। बिजली विभाग और नगर निगम की टीमें भी राहत व मरम्मत कार्य में लग गई हैं।
जलवायु परिवर्तन की चेतावनी?
स्थानीय पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की असमय और तीव्र ओलावृष्टि जलवायु परिवर्तन का संकेत हो सकती है। मौसम विभाग ने आने वाले 48 घंटे में और बारिश व गरज-चमक के साथ ओले पड़ने की संभावना जताई है।
ओलों ने किसानों की आजीविका पर डाला गहरा असर, ग्रामीणों में मायूसी
गोरखपुर में अचानक हुई भारी ओलावृष्टि ने किसानों की आर्थिक स्थिति को डगमगा दिया है। रबी की फसल की बुवाई से ठीक पहले इस नुकसान ने ग्रामीणों को चिंता में डाल दिया है। कुछ जगहों पर तो किसानों ने बैंकों से ऋण लेकर खेती की थी, जिनके चुकता करने का अब कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा।
सहजनवां ब्लॉक के गांव बक्शीपुर निवासी किसान शिवकुमार ने बताया, “मैंने दो एकड़ खेत में मक्का और धनिया बोई थी। अब पूरा खेत बर्बाद हो गया है। फसलें इस समय तैयार हो रही थीं, लेकिन ओलों ने जड़ से उखाड़ दिया।”
गांवों में मवेशियों के लिए चारा संकट
बारिश और ओलावृष्टि के कारण खेतों में हरी चरी, नेपियर घास, बाजरा जैसे चारे की फसलें भी बर्बाद हो गई हैं। कई जगहों पर मवेशियों के लिए चारा संकट पैदा हो गया है। चूंकि गांवों में पशुपालन आजीविका का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, ऐसे में यह नुकसान केवल खेतों तक सीमित नहीं रह गया।
कृषि वैज्ञानिकों की सलाह
किसानों को सलाह दी कि जो फसलें आंशिक रूप से प्रभावित हुई हैं, उन्हें उखाड़ने की जगह उनके जैविक उपचार और पोषण प्रबंधन के माध्यम से बचाया जा सकता है। उन्होंने कहा, “किसानों को घबराने की आवश्यकता नहीं है। कृषि विभाग की टीम हर गांव में जाकर निरीक्षण करेगी और सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।”
बीमा योजना का सहारा
कई किसान जिनकी फसलें प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत थीं, उन्हें राहत की उम्मीद है। हालांकि, कई किसान योजना से बाहर भी हैं, जिनके लिए मुआवजा पाने की प्रक्रिया अब जिलाधिकारी के सर्वे और अनुमोदन पर निर्भर है।
व्यवसायियों और दुकानदारों पर भी असर
ओलों ने न केवल खेती बल्कि व्यापार पर भी असर डाला। गोलघर, रेती रोड और अलीनगर जैसे क्षेत्रों में छोटे दुकानदारों ने बताया कि ओलों की वजह से उनकी दुकानों का टीन, बोर्ड और इलेक्ट्रॉनिक सामान क्षतिग्रस्त हो गया। कुछ दुकानों में पानी भर गया, जिससे सामान खराब हो गया।
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