संवादाताः मुकेश साहनी‚घर तक एक्सप्रेस। नई दिल्ली में सहकारिता मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति की दूसरी बैठक केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में सहकारिता राज्य मंत्री श्री कृष्ण पाल और श्री मुरलीधर मोहोल, समिति के सदस्य, मंत्रालय के सचिव एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। केंद्रीय सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सहकारिता को एक मजबूत व्यावसायिक मॉडल के रूप में खड़ा करने की दिशा में तेज़ी से कार्य हो रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि सरकार का लक्ष्य पांच वर्षों में 2 लाख बहुउद्देशीय सहकारी समितियों की स्थापना का है,
श्री शाह ने स्पष्ट किया कि सहकारी मॉडल ही भूमिहीन, पूंजीहीन और छोटे किसानों के लिए आर्थिक समृद्धि का सबसे व्यवहारिक मार्ग है। उन्होंने बताया कि तीन राष्ट्रीय स्तर की बहु-राज्य सहकारी समितियाँ—राष्ट्रीय सहकारी ऑर्गेनिक लिमिटेड (NCOL), राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (NCEL) और भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (BBSSL)—की स्थापना की गई है, जो किसानों को प्रमाणिकता, ब्रांडिंग, निर्यात सुविधा और बीज उत्पादन जैसे क्षेत्रों में सहारा प्रदान करती हैं। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पिछले चार वर्षों में सहकारिता मंत्रालय द्वारा 100 से अधिक प्रमुख पहलें की गई हैं। इनमें डिजिटल सुधार, नीतिगत परिवर्तन, वित्तीय सहायता, संस्थागत क्षमता निर्माण, और सहकारी शासन प्रणाली की मजबूती शामिल हैं। राष्ट्रीय सहकारी नीति-2025 को भी एक ऐसा रोडमैप बताया गया, जो देश में सतत सहकारी विकास को सुनिश्चित करेगा। उन्होंने इस नीति को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY), राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (NPDD) और अन्य केंद्र सरकार की योजनाओं के साथ समन्वय में क्रियान्वित करने की बात कही।
श्री शाह ने बताया कि श्वेत क्रांति 2.0 के तहत अगले पांच वर्षों में देश में दूध खरीद को 50% तक बढ़ाने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि अब तक राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) ने 15 राज्यों की 25 मिल्क यूनियनों के साथ मिलकर डेयरी समितियों में बायोगैस संयंत्र लगाने हेतु समझौते किए हैं। इस कदम से ऊर्जा आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
- राष्ट्रीय सहकारी ऑर्गेनिक लिमिटेड (NCOL) – किसानों के ऑर्गेनिक उत्पादों की प्रमाणिकता, ब्रांडिंग और विपणन हेतु।
- राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (NCEL) – किसानों के उत्पादों को वैश्विक बाज़ार में पहुंचाने के लिए।
- भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (BBSSL) – परंपरागत बीजों के संरक्षण, उत्पादन और वितरण के लिए।
पिछले चार वर्षों में सहकारिता मंत्रालय द्वारा 100 से अधिक महत्त्वपूर्ण पहलें की गईं। इनमें प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS), सहकारी बैंकों, मत्स्य समितियों, और डेयरी संगठनों को आधुनिक बनाने की दिशा में सुधार शामिल हैं। इसमें डिजिटल प्रणाली को अपनाना, पारदर्शी कार्यप्रणाली विकसित करना और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना प्रमुख हैं।
राष्ट्रीय सहकारी नीति-2025
राष्ट्रीय सहकारी नीति-2025 देश में सहकारिता को संगठित और टिकाऊ रूप में विकसित करने के लिए एक मार्गदर्शक दस्तावेज है। यह नीति विभिन्न मंत्रालयों, राज्य सरकारों और सहकारी संस्थानों के समन्वय से बनाई गई है। इसमें सहकारी समितियों की भूमिका को कृषि, डेयरी, ग्रामीण उद्योगों और सेवाओं में मजबूत करने की दिशा में स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
क्रांति 2.0
सहकारिता मंत्रालय ने श्वेत क्रांति 2.0 की घोषणा की है, जिसके अंतर्गत अगले पाँच वर्षों में सहकारी समितियों द्वारा दूध की खरीद 50 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। यह क्रांति केवल दुग्ध उत्पादन को नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में आय और पोषण स्तर को भी बेहतर बनाएगी।
11,871 मौजूदा समितियाँ सशक्त
मंत्रालय ने 11,871 मौजूदा डेयरी समितियों को संरचनात्मक और संस्थागत रूप से मजबूत किया है। इसके तहत तकनीकी प्रशिक्षण, वित्तीय प्रबंधन, गुणवत्ता नियंत्रण और विपणन तंत्र को उन्नत किया गया है, जिससे इन समितियों की कार्यक्षमता और विश्वसनीयता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी
भारत में सहकारी शिक्षा और प्रशिक्षण को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से स्थापित त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी को संसदीय अधिनियम के माध्यम से राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित किया गया है। यह यूनिवर्सिटी सहकारी क्षेत्र के लिए एकीकृत और मानकीकृत पाठ्यक्रम प्रदान करेगी, जिससे पेशेवर मानव संसाधन तैयार होंगे।
निगरानी और समन्वय के लिए संस्थागत तंत्र
सहकारिता कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन और निगरानी के लिए मंत्रालय ने चार प्रमुख संस्थागत निकाय गठित किए हैं:
- IMC (अंतर-मंत्रालयी समिति)
- NLCC (राष्ट्रीय स्तर समन्वय समिति)
- SCDC (राज्य सहकारी विकास समितियाँ)
- DCDC (जिला सहकारी विकास समितियाँ)
Source : PIB
रिपोर्ट : मुकेश साहनी : GT Express न्यूज़ डेस्क | AN Next Media Network Private Limited
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