उत्तर प्रदेश परिवहन निगम
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गोरखपुर बस अड्डे पर अवैध बस संचालन से परिवहन निगम में आक्रोश RTO और पुलिस पर मिलीभगत का आरोप

गोरखपुर संवादाताः मुकेश साहनी‚घर तक एक्सप्रेस। गोरखपुर परिवहन निगम बस अड्डे पर इन दिनों अवैध बस संचालकों की दबंगई ने वैध बस चालकों और यात्रियों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। आरोप है कि ये अवैध संचालक न केवल यात्रियों को जबरन खींचकर अपनी बसों में बैठाते हैं, बल्कि निगम चालकों और कर्मचारियों को भी धमकाते हैं। इससे न केवल राजस्व की हानि हो रही है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा भी खतरे में पड़ गई है। परिवहन निगम के चालकों ने खुलकर कहा कि RTO और स्थानीय पुलिस की मिलीभगत के बिना यह सब मुमकिन नहीं है। इन अधिकारियों पर आरोप है कि वे अवैध बसों को जानबूझकर नजरअंदाज कर रहे हैं, जिससे अवैध संचालकों के हौसले और बुलंद हो गए हैं।

दबंगई और डर का माहौल

गोरखपुर बस अड्डे पर यात्रियों की भीड़ लगते ही अवैध बस संचालक सक्रिय हो जाते हैं। वे खुद को “प्राइवेट टूर ऑपरेटर” या “शॉर्टकट सेवा प्रदाता” बताते हुए यात्रियों को भ्रमित करते हैं और दबाव बनाकर अपनी बसों में बिठा लेते हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ लोग यात्रियों के सामान तक को जबरदस्ती खींचकर बसों में रख देते हैं, ताकि यात्री विरोध न कर सकें। परिवहन निगम के चालकों ने इस दबंगई से परेशान होकर कई बार स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन कार्रवाई न के बराबर हुई।

RTO और पुलिस पर मिलीभगत के आरोप

यूनियन नेताओं और कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि RTO और पुलिस को इस समस्या की पूरी जानकारी है, लेकिन वे चुप्पी साधे बैठे हैं। सूत्रों के अनुसार, कुछ अधिकारियों को नियमित रूप से ‘हफ्ता’ दिया जाता है, जिसके बदले में वे इन अवैध बसों को न केवल अनदेखा करते हैं, बल्कि कई बार सहायता भी प्रदान करते हैं। इससे निगम को हर महीने लाखों का नुकसान हो रहा है। यात्री अक्सर इन अवैध बसों में फंस कर परेशानी झेलते हैं — समय से न पहुंचना, खराब बसें, सुरक्षा का अभाव और ओवरलोडिंग आम समस्याएं हैं।

यूनियन की चेतावनी और आंदोलन की तैयारी

परिवहन निगम कर्मचारी यूनियन के क्षेत्रीय मंत्री राजेश कुमार पाण्डेय और वरिष्ठ कार्मिक रामदुलारे ने स्पष्ट किया है कि यदि प्रशासन ने एक सप्ताह के अंदर ठोस कार्रवाई नहीं की, तो यूनियन पूरे जिले में आंदोलन छेड़ेगी। उन्होंने कहा, “हम अब सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं। यह केवल हमारी आजीविका का सवाल नहीं, यात्रियों की सुरक्षा का भी सवाल है। यदि शासन आंख मूंदे रहा, तो चक्का जाम भी एक विकल्प होगा।” यूनियन की योजना है कि अगले सप्ताह जिलाधिकारी कार्यालय पर धरना प्रदर्शन किया जाए और मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा जाए। यूनियन का कहना है कि यह केवल गोरखपुर की नहीं, बल्कि पूरे पूर्वांचल की समस्या है।

संभावित प्रशासनिक कार्रवाई

प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिलाधिकारी कार्यालय ने परिवहन विभाग से रिपोर्ट तलब की है। RTO कार्यालय पर आंतरिक जांच बैठाई जा रही है और सूत्रों की मानें तो जल्द ही एक संयुक्त टीम द्वारा बस अड्डे पर छापेमारी की जा सकती है। गोरखपुर मंडलायुक्त ने भी संज्ञान लिया है और कहा है कि “यात्रियों की असुविधा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। किसी भी गैरकानूनी संचालन को सख्ती से रोका जाएगा।”

हालांकि इस बीच, अवैध संचालकों का नेटवर्क और उनका “सिस्टम” अभी भी पूरी तरह सक्रिय है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब तक पुलिस और RTO में सख्त कार्रवाई नहीं होती, ये गतिविधियाँ यूँ ही चलती रहेंगी।

रिपोर्ट : मुकेश साहनी : GT Express न्यूज़ डेस्क | AN Next Media Network Private Limited

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