बंगलादेश - भारत
,

बंगलादेश – भारत सरकार ने आयात पर लगाया बंदरगाह प्रतिबंध और किसानो के हित में उठाया कदम

भारत सरकार ने देश के जूट किसानों और घरेलू जूट उद्योग को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय कपड़ा मंत्री श्री गिरिराज सिंह ने आज लोकसभा में लिखित उत्तर के माध्यम से जानकारी दी कि केंद्र सरकार ने वाणिज्य मंत्रालय के माध्यम से बांग्लादेश से आयातित जूट की वस्तुओं पर एंटी-डंपिंग शुल्क (एडीडी) लागू किया है, जिसकी अंतिम समीक्षा की गई है। इसके अलावा, बांग्लादेश से भारत में जूट सहित कुछ वस्तुओं के आयात पर बंदरगाह प्रतिबंध भी लागू कर दिया गया है, जिससे घरेलू जूट उद्योग को समान अवसर मिल सके।केंद्र सरकार ने यह प्रतिबंध 27 जून 2025 की अधिसूचना के माध्यम से लागू किया है। इससे पहले, 30 दिसंबर 2022 को जारी अधिसूचना द्वारा पांच वर्षों के लिए बांग्लादेश से जूट उत्पादों पर एंटी-डंपिंग शुल्क लगाया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य यह था कि सस्ते आयात से घरेलू जूट उद्योग प्रभावित न हो और देश के किसानों व श्रमिकों को उचित लाभ मिल सके।सरकार की यह नीति केवल जूट उद्योग की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका व्यापक उद्देश्य किसानों के हितों की रक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देना है। इसी के तहत सरकार ने कच्चे जूट की कीमतों को स्थिर बनाए रखने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) निर्धारित किया है। इस पहल से लगभग 40 लाख जूट किसान लाभान्वित हो रहे हैं, जो मुख्यतः पश्चिम बंगाल, असम, ओडिशा और बिहार जैसे राज्यों में जूट की खेती करते हैं।

खाद्यान्न और चीनी
इसके अतिरिक्त, ‘जूट पैकेजिंग सामग्री अधिनियम, 1987’ के तहत केंद्र सरकार ने खाद्यान्न और चीनी जैसे आवश्यक वस्तुओं की पैकिंग में जूट की बोरियों के उपयोग को अनिवार्य कर दिया है। मौजूदा आदेशों के अनुसार, सरकार ने 100% खाद्यान्न और 20% चीनी को जूट की बोरियों में पैक करना अनिवार्य बनाया है। इससे जूट उद्योग को स्थायी मांग सुनिश्चित होती है, और प्लास्टिक जैसी पर्यावरण-हानिकारक पैकिंग सामग्री का उपयोग घटता है।

भारत – बांग्लादेश

केंद्रीय कपड़ा मंत्री ने संसद को यह भी बताया कि बाजार में कच्चे जूट की कीमतों की निगरानी के लिए ‘जूट एवं जूट वस्त्र नियंत्रण आदेश, 2016’ के अंतर्गत सरकार समय-समय पर आवश्यक नियामक कार्रवाई करती है। इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि व्यापारी, बिचौलिये या आयातक कच्चे जूट के मूल्य को मनमाने तरीके से न बढ़ा सकें और किसानों को नुकसान न हो। पिछले कुछ वर्षों में भारत में जूट के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा काफी बढ़ी है। खासकर बांग्लादेश जैसे देशों से सस्ते दामों पर आयातित जूट के कारण घरेलू उत्पादन प्रभावित हुआ। इसने न केवल जूट उत्पादकों को संकट में डाला बल्कि हजारों श्रमिकों की आजीविका पर भी संकट मंडराने लगा। ऐसे में सरकार का यह कदम स्थानीय उद्योग के लिए संजीवनी के समान माना जा रहा है।

MSP ,WTO और एंटी-डंपिंग नीति
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022-23 में भारत में करीब 95 लाख गांठ कच्चे जूट का उत्पादन हुआ। इनमें से अधिकांश उत्पादन पश्चिम बंगाल में केंद्रित था। सरकार की नीतियों का प्रभाव यह हुआ है कि वर्ष 2024-25 में यह उत्पादन 8% की वृद्धि के साथ 1.03 करोड़ गांठ तक पहुँच गया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि MSP और एंटी-डंपिंग नीति इसी प्रकार लागू रही, तो अगले तीन वर्षों में भारत आत्मनिर्भर जूट उत्पादक देश बन सकता है।वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने बांग्लादेश से आने वाले जूट के थैलों, रस्सियों, और बोरे जैसी वस्तुओं पर अतिरिक्त शुल्क लगाया है ताकि इनका दाम भारतीय उत्पादों के बराबर हो सके। इससे सस्ते जूट उत्पादों की बाढ़ पर रोक लगेगी और घरेलू उत्पादन को बराबरी का अवसर मिलेगा। यह कदम WTO के एंटी-डंपिंग प्रावधानों के अनुरूप है

Source : PIB

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *