मैनुअल स्कैवेंजिंग उन्मूलन

मैनुअल स्कैवेंजिंग उन्मूलन नमस्ते योजना से स्वच्छता कर्मियों का पुनर्वास और शून्य मृत्यु दर का लक्ष्य

संपादकः मुकेश साहनी घर तक एक्सप्रेस न्युज। मैनुअल स्कैवेंजर्स के रूप में रोजगार का निषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013 को प्रभावी बनाने की दिशा में सरकार ने निर्णायक कदम उठाते हुए सीवर और सेप्टिक टैंकों की मशीनीकृत सफाई, शून्य मृत्यु दर और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन श्रृंखला से जुड़े कचरा बीनने वालों के पुनर्वास को प्रमुख लक्ष्य घोषित किया है। संसद द्वारा सितंबर 2013 में पारित और दिसंबर 2013 से लागू यह अधिनियम अब देश की स्वच्छता नीतियों की रीढ़ बन गया है। हाल ही में केंद्रीय पर्यवेक्षण समिति (सीएमसी) की बैठक में न केवल अब तक की उपलब्धियों की समीक्षा की गई, बल्कि भावी रणनीति पर भी चर्चा की गई। बैठक में राज्यसभा सांसद श्री मिथिलेश कुमार, सीएमसी के सदस्य श्री भागवत प्रसाद मकवाना, श्रीमती अंजना पंवार, श्री राम सिंह बाल्मीकि, सुश्री आभा कुमार, श्री नंद जी मिश्रा, श्री आर.एम. श्रीराम और श्री चमन तुलस्यान शामिल हुए। इनके अलावा, सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग के सचिव, विभिन्न राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारी और कई केंद्रीय मंत्रालयों व आयोगों के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य था—एमएस अधिनियम, 2013 और नमस्ते योजना (राष्ट्रीय मशीनीकृत स्वच्छता इकोसिस्टम) के तहत अब तक हुए कार्यों का मूल्यांकन करना और चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा करना।

बैठक में प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार, स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत देश के अधिकांश अस्वच्छ शौचालय अब स्वच्छ शौचालयों में परिवर्तित किए जा चुके हैं, जिससे मैला ढोने की समस्या लगभग समाप्त हो चुकी है। अब सरकार का ध्यान पूरी तरह इस बात पर है कि किसी भी हाल में सीवर या सेप्टिक टैंक की सफाई बिना मशीनरी और सुरक्षात्मक उपकरणों के न की जाए। नमस्ते योजना का मूल मंत्र है: “शून्य मृत्यु दर और मानव मल के सीधे संपर्क से पूर्ण परहेज”। नमस्ते योजना के तहत अब तक की बड़ी उपलब्धियां भी बैठक में साझा की गईं। देश के 4800 से अधिक शहरी स्थानीय निकायों में 86,806 सीवर और सेप्टिक टैंक कर्मचारियों (एसएसडब्ल्यू) का प्रोफाइल तैयार कर उन्हें मान्य किया गया। इनमें से 76,731 कर्मचारियों को पीपीई किट वितरित की गईं, 58,583 लाभार्थियों को आयुष्मान कार्ड दिए गए और 639 आपातकालीन प्रतिक्रिया स्वच्छता इकाइयां (ईआरएसयू) स्थापित की गईं। इसके अलावा, 604 उत्तरदायी स्वच्छता प्राधिकरण नियुक्त किए गए और 346 ईआरएसयू में हेल्पलाइन नंबर भी चालू हो गए हैं। सरकार ने कचरा बीनने वालों को भी नमस्ते योजना में शामिल कर पुनर्वास की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल की है। 2024-25 से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन में लगे 96,255 कचरा बीनने वालों का प्रोफाइल तैयार किया गया, जिनमें से 46,245 को मान्यता मिल चुकी है। इससे इस उपेक्षित वर्ग को भी स्वास्थ्य सुरक्षा, वित्तीय सहयोग और सामाजिक सम्मान की दिशा में ठोस सहारा मिलेगा। बैठक में सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों पर भी चर्चा हुई। 20 अक्टूबर 2023 को डॉ. बलराम सिंह द्वारा दायर याचिका (डब्ल्यूपी (सी) संख्या 324/2020) पर दिए गए फैसले के अनुपालन में 696 जिलों ने नया सर्वेक्षण पूरा कर लिया है और खुद को मैला ढोने से मुक्त घोषित किया है। अदालत के आदेश के अनुसार, सीवर पीड़ितों को बढ़ा हुआ मुआवजा भी दिया जा रहा है।

सरकार ने स्वच्छता परियोजनाओं और वाहनों के लिए पूंजीगत सब्सिडी में भी वृद्धि की है। पहले यह राशि 5 लाख रुपये थी, जिसे बढ़ाकर व्यक्तियों के लिए 7.50 लाख रुपये कर दिया गया है। पाँच व्यक्तियों के समूह लिए अधिकतम सीमा को 18.75 लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये कर दिया गया है। साथ ही, निजी स्वच्छता सेवा संचालकों और निजी ठेकेदारों को भी परियोजना लागत के 25 प्रतिशत या 10 लाख रुपये (जो भी कम हो) तक की सब्सिडी के लिए पात्र बनाया गया है। हालाँकि समिति ने कुछ राज्यों की लापरवाही पर गहरी चिंता व्यक्त की। पाया गया कि कई राज्यों ने अभी तक एमएस अधिनियम, 2013 और एमएस नियम, 2013 के तहत आवश्यक समितियों का गठन नहीं किया है। न ही उन्होंने नया सर्वेक्षण पूरा किया है और न ही राज्य स्तरीय सर्वेक्षण समिति की रिपोर्ट प्रस्तुत की है। समिति ने चेतावनी दी कि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। सीवर और सेप्टिक टैंकों की खतरनाक सफाई के दौरान लगातार होने वाली मौतों को समिति ने गंभीर मुद्दा माना। बैठक में यह दोहराया गया कि मशीनीकृत सफाई को प्राथमिकता दी जाए और आवश्यक सुरक्षा उपकरणों का उपयोग सुनिश्चित हो। समिति का मानना है कि जब तक मशीनों का इस्तेमाल सार्वभौमिक स्तर पर नहीं होगा, तब तक “शून्य मृत्यु दर” का लक्ष्य अधूरा रहेगा। अंत में, समिति ने सभी संबंधित पक्षों—राज्य सरकारों, शहरी निकायों, निजी ठेकेदारों और मंत्रालयों—को यह स्पष्ट निर्देश दिया कि नमस्ते योजना के लक्ष्यों को धरातल पर उतारने के लिए ठोस कदम उठाए जाएँ। खासतौर पर, मानव मल के सीधे संपर्क पर पूर्ण प्रतिबंध और सीवर-सफाई में आधुनिक तकनीक के व्यापक उपयोग पर बल दिया गया।

Source : PIB | रिपोर्ट : मुकेश साहनी : GT Express न्यूज़ डेस्क | 

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