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दिल्ली में वोटर लिस्ट विवाद पर फिर बवाल, प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया

संपादक: Arvind Kumar Sahani |प्रकाशित: 03 अक्टूबर 2026, 10:49 अपराह्न
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नई दिल्ली, 3 अक्टूबर 2026: राजधानी दिल्ली में मतदाता सूची में बदलाव और Special Intensive Revision (SIR) को लेकर चल रहा विरोध प्रदर्शन शनिवार को लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा। जंतर-मंतर के आसपास प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति बनी और कई लोगों को हिरासत में लिया गया।

Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 100 प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बैरिकेड हटाने की कोशिश की और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर नारे लगाए। इसके बाद पुलिस ने कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। पुलिस ने हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या और पहचान तत्काल सार्वजनिक नहीं की।

प्रदर्शन में स्वतंत्र सांसद कपिल सिब्बल, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन की अध्यक्ष नेहा बोरा और सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण तथा योगेंद्र यादव के शामिल होने की जानकारी Reuters के प्रत्यक्षदर्शी ने दी। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव से बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं और इससे चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं।

वहीं, चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सत्यापन अभियान का उद्देश्य डुप्लीकेट, मृत या अपात्र मतदाताओं के नाम हटाना तथा पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करना है। आयोग ने शुक्रवार को अधिकारियों को निर्देश दिया था कि जो पात्र मतदाता सूची से छूट गए हैं या नए पात्र हुए हैं, उनके नाम दर्ज किए जाएं।

इससे पहले शुक्रवार को भी दिल्ली में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था। पुलिस के अनुसार, शहर में बड़े जमावड़े पर प्रतिबंध लागू था। कुछ हिरासत में लिए गए लोगों पर प्रतिबंधात्मक आदेशों के कथित उल्लंघन के आरोप लगाए गए हैं।

मतदाता सूची का यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब देश में चुनावी सूची के सत्यापन को लेकर राजनीतिक दलों और नागरिक समूहों के बीच बहस तेज है। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त से जवाबदेही की मांग कर रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग अपने सत्यापन अभियान को मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाने की प्रक्रिया बता रहा है।

क्या है आगे की स्थिति? दिल्ली में प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई के बीच सबसे अहम मुद्दा यह है कि पात्र मतदाताओं के नाम सूची में सुरक्षित रहें और आपत्तियों का निपटारा पारदर्शी तरीके से हो। फिलहाल शनिवार की हिरासत के संबंध में पुलिस की ओर से विस्तृत आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं कराया गया है।