राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने एम्स, कल्याणी के दीक्षांत समारोह में की भागीदारी
देश की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने हाल ही में पश्चिम बंगाल स्थित एम्स (AIIMS), कल्याणी के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस अवसर ने न केवल संस्थान के छात्रों के लिए गर्व का पल रचा बल्कि समूचे देश के लिए भी एक प्रेरणा का कार्य किया। कार्यक्रम में छात्रों को डिग्री प्रदान की गई, साथ ही राष्ट्रपति ने उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ भी दीं।
एम्स कल्याणी – पूर्वी भारत की मेडिकल शिक्षा का केंद्र
एम्स कल्याणी को पूर्वी भारत के एक महत्वपूर्ण चिकित्सा संस्थान के रूप में देखा जाता है। यह संस्थान भारत सरकार द्वारा ‘AIIMS’ श्रृंखला के अंतर्गत स्थापित किया गया है ताकि उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सेवाएं एवं शिक्षा को क्षेत्रीय स्तर तक पहुँचाया जा सके। आधुनिक सुविधाओं से लैस यह संस्थान आज न केवल छात्रों के लिए बल्कि आमजन के लिए भी भरोसे का प्रतीक बन चुका है।
दीक्षांत समारोह की झलकियाँ
समारोह का आरंभ
दीक्षांत समारोह की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुई। इसके बाद संस्थान के निदेशक द्वारा स्वागत भाषण प्रस्तुत किया गया जिसमें उन्होंने एम्स कल्याणी की उपलब्धियों, अनुसंधान कार्यों और भविष्य की योजनाओं का विवरण दिया।
राष्ट्रपति का प्रेरणादायक संबोधन
अपने संबोधन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा:
“आप सभी आज केवल डिग्रीधारी नहीं बने हैं, बल्कि अब आप देश की सेवा में समर्पित एक ज़िम्मेदार चिकित्सक के रूप में आगे बढ़ेंगे। यह केवल एक पेशा नहीं बल्कि मानवता की सेवा का मार्ग है।”
उन्होंने मेडिकल छात्रों को यह याद दिलाया कि ज्ञान का वास्तविक उद्देश्य सेवा और संवेदनशीलता में निहित है।
मानवता की सेवा पर विशेष बल
राष्ट्रपति ने कहा कि महामारी के समय डॉक्टरों, नर्सों और हेल्थकेयर वर्कर्स ने जो सेवा भावना दिखाई, वह राष्ट्र को हमेशा याद रहेगा। उन्होंने आने वाले चिकित्सकों से भी यही अपेक्षा जताई कि वे भी इसी भावना के साथ काम करें।
मेडिकल शिक्षा और अनुसंधान का बढ़ता दायरा
राष्ट्रपति ने भारतीय चिकित्सा क्षेत्र की उपलब्धियों पर चर्चा करते हुए कहा कि आज भारत न केवल मेडिकल टूरिज्म के लिए जाना जाता है बल्कि अनुसंधान और नवाचार में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने छात्रों को आधुनिक तकनीक, टेलीमेडिसिन, डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड्स और AI आधारित चिकित्सा सेवाओं में दक्ष बनने की सलाह दी।
छात्र सम्मानित
समारोह में मेडिकल स्नातकों को MBBS, MD, MS सहित विभिन्न पाठ्यक्रमों की डिग्रियाँ प्रदान की गईं। कई छात्रों को उनकी शैक्षणिक उत्कृष्टता, अनुसंधान कार्य एवं सामाजिक योगदान के लिए पुरस्कार भी दिए गए।
एक छात्रा ने कहा:
“राष्ट्रपति से डिग्री प्राप्त करना जीवन का सबसे गौरवपूर्ण क्षण है। हम इसे कभी नहीं भूल सकते।”
राष्ट्र निर्माण में डॉक्टरों की भूमिका
राष्ट्रपति मुर्मू ने इस बात पर बल दिया कि डॉक्टर न केवल जीवन रक्षक होते हैं बल्कि समाज निर्माण में भी अहम भूमिका निभाते हैं। स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, पहुंच और सहानुभूति से भरी सेवाएं ही किसी राष्ट्र की असली शक्ति होती हैं।
भविष्य की योजनाएं – एम्स कल्याणी
एम्स कल्याणी प्रशासन ने इस अवसर पर अपनी आगामी योजनाओं की भी घोषणा की, जिसमें शामिल हैं:
- सुपर स्पेशियलिटी विभागों की स्थापना
- अत्याधुनिक अनुसंधान केंद्र
- ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए आउटरीच प्रोग्राम
- अधिक छात्रवृत्ति योजनाएं और पीएचडी कार्यक्रम
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की सराहना
राष्ट्रपति ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रयासों की भी सराहना की जिनके अंतर्गत देश के हर हिस्से में AIIMS जैसे संस्थान स्थापित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे न केवल शिक्षा को बल मिलेगा बल्कि रोजगार और स्वास्थ्य सेवाओं में व्यापक सुधार होगा।
सामाजिक सरोकार और मेडिकल शिक्षा
राष्ट्रपति ने विशेष रूप से यह संदेश दिया कि मेडिकल शिक्षा केवल तकनीकी ज्ञान तक सीमित न हो, बल्कि इसमें सेवा, नैतिकता और संवेदनशीलता का समावेश अनिवार्य है। उन्होंने छात्रों को सुझाव दिया कि वे ग्रामीण भारत में भी जाकर सेवा करें।
स्थानीय समुदाय की भागीदारी
इस आयोजन में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, शिक्षाविदों, स्वास्थ्य अधिकारियों और सैकड़ों विद्यार्थियों के परिजन भी शामिल हुए। यह कार्यक्रम पश्चिम बंगाल के कल्याणी शहर के लिए भी एक ऐतिहासिक दिन बन गया।
राष्ट्रपति की यात्रा का स्थानीय महत्व
राष्ट्रपति का किसी संस्थान में आना केवल एक औपचारिकता नहीं होती, बल्कि यह उस संस्था के लिए एक ऐतिहासिक क्षण बन जाता है। एम्स कल्याणी के लिए भी यह अवसर ऐसा ही था। कल्याणी जैसे छोटे लेकिन तेजी से विकसित हो रहे शहर में भारत की प्रथम नागरिक का आगमन, स्थानीय निवासियों के लिए गौरव का विषय रहा।
लोगों ने सड़कों के किनारे खड़े होकर राष्ट्रपति का स्वागत किया। बच्चों में विशेष उत्साह देखा गया और स्कूलों में इस विषय पर भाषण, चित्रकला और निबंध प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। यह दिन न केवल मेडिकल छात्रों के लिए, बल्कि पूरे शहर के लिए एक “यादगार दिन” बन गया।
छात्रों की भावनाएं और अनुभव
दीक्षांत समारोह छात्रों के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है। चार या पाँच वर्षों की कठिन पढ़ाई, इंटर्नशिप, नाइट ड्यूटी और लगातार परीक्षा देने के बाद जब एक छात्र को मंच पर बुलाकर डिग्री दी जाती है, तो वह क्षण जीवनभर की मेहनत का फल बन जाता है।
एक छात्र ने राष्ट्रपति के हाथों डिग्री प्राप्त करने के बाद कहा:
“मैंने कभी नहीं सोचा था कि एक छोटे से गाँव से आकर मैं राष्ट्रपति के सामने खड़ा हो पाऊँगा। यह केवल मेरी नहीं, मेरे माता-पिता के संघर्षों की जीत है।”
ऐसे अनुभव विद्यार्थियों को जीवन में और भी ऊँचाइयाँ छूने के लिए प्रेरित करते हैं।
भारत में मेडिकल शिक्षा – चुनौतियाँ और अवसर
राष्ट्रपति ने इस अवसर पर भारत में चिकित्सा शिक्षा की मौजूदा स्थिति पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि देश में हर वर्ष लाखों छात्र मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET) में बैठते हैं, लेकिन सीटें सीमित होने के कारण केवल कुछ प्रतिशत ही प्रवेश ले पाते हैं।
इस परिस्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने AIIMS, IIT, IIM जैसे संस्थानों को देश के अलग-अलग हिस्सों में खोलने का निर्णय लिया है। एम्स कल्याणी भी इसी नीति का परिणाम है। इसका उद्देश्य है — “सबको सुलभ, सस्ती और समावेशी चिकित्सा शिक्षा प्रदान करना।”
सामुदायिक स्वास्थ्य सेवा में AIIMS की भूमिका
AIIMS जैसे संस्थान केवल शिक्षा ही नहीं देते, बल्कि वे आस-पास के समुदायों के लिए एक स्वास्थ्य सेवा केंद्र भी होते हैं। कल्याणी के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को अब इलाज के लिए कोलकाता या दिल्ली जाने की आवश्यकता नहीं है। यहाँ उपलब्ध आधुनिक सुविधाएं उन्हें घर के पास ही चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराती हैं।
इसके साथ ही AIIMS कल्याणी में निःशुल्क परामर्श शिविर, टीकाकरण अभियान, स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम भी नियमित रूप से आयोजित होते हैं।
अनुसंधान और नवाचार – चिकित्सा के नए क्षितिज
राष्ट्रपति ने छात्रों को यह भी समझाया कि आने वाला युग केवल इलाज का नहीं, बल्कि रोगों की समयपूर्व पहचान और नवीन उपचार तकनीकों का है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अनुसंधान को केवल एक शैक्षणिक औपचारिकता न समझें, बल्कि उसे मानवता की भलाई के लिए करें।
AIIMS कल्याणी में बायोटेक्नोलॉजी, नैनोमेडिसिन, जनरल मेडिसिन AI, और मेडिकल रोबोटिक्स जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान कार्य चल रहा है, जिससे आने वाले वर्षों में चिकित्सा पद्धतियों में क्रांतिकारी बदलाव आने की उम्मीद है।
प्रेरणा का स्त्रोत बना AIIMS कल्याणी
आज एम्स कल्याणी ना सिर्फ शिक्षा का केन्द्र बन गया है बल्कि यह पूर्वी भारत में आशा का प्रतीक भी है। स्थानीय युवाओं को अब चिकित्सा की उच्च शिक्षा अपने ही राज्य में सुलभ हो गई है। इसकी बदौलत पश्चिम बंगाल और उत्तर-पूर्व भारत के हजारों छात्रों को नई दिशा मिली है।अपनी टोपी उछालकर इस दिन को यादगार बना दिया।
निष्कर्ष
एम्स, कल्याणी के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की उपस्थिति ने इस कार्यक्रम को गौरवपूर्ण और प्रेरणादायक बना दिया। उन्होंने नव-दीक्षित डॉक्टरों को एक दिशा दी—जो ज्ञान से सेवा, तकनीक से संवेदनशीलता और उपलब्धियों से सामाजिक उत्थान की ओर ले जाती है।
यह दीक्षांत समारोह न केवल छात्रों के जीवन का एक मील का पत्थर साबित हुआ, बल्कि यह समूचे भारत के लिए एक संदेश भी था—चिकित्सा सेवा ही सच्ची राष्ट्र सेवा है।
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