नई दिल्ली/दुबई, 4 अक्टूबर 2026: ईरान ने कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को तब तक दोबारा नहीं खोला जाएगा, जब तक जून में हुए अंतरिम समझौते में तय सात शर्तें पूरी नहीं होतीं। ईरान के इस रुख से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा और समुद्री व्यापार मार्गों में से एक को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।
रॉयटर्स की 4 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक ईरानी पक्ष ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने को इन शर्तों से जोड़ा है। यह जलमार्ग खाड़ी क्षेत्र से वैश्विक बाजारों तक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, इसलिए यहां लंबे समय तक व्यवधान रहने पर तेल बाजार और समुद्री परिवहन लागत पर दबाव बढ़ सकता है।
क्यों महत्वपूर्ण है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और आगे अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया के तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इस समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में यहां आवाजाही प्रभावित होने पर एशिया समेत कई आयातक देशों की ऊर्जा सुरक्षा और कीमतों पर असर पड़ सकता है।
भारत के लिए भी यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है और पश्चिम एशिया से आने वाली ऊर्जा आपूर्ति तथा समुद्री परिवहन की लागत में बदलाव का असर घरेलू ईंधन बाजार पर पड़ सकता है। हालांकि, इस समय पेट्रोल-डीजल की घरेलू कीमतों पर किसी तत्काल प्रभाव का दावा करना जल्दबाजी होगी।
ईरान के फैसले का संभावित असर
यदि जलमार्ग पर प्रतिबंध लंबे समय तक बना रहता है, तो जहाजों को वैकल्पिक मार्ग अपनाने की जरूरत पड़ सकती है। इससे यात्रा का समय, बीमा और माल ढुलाई लागत बढ़ सकती है। तेल बाजार में जोखिम प्रीमियम बढ़ने की स्थिति में वैश्विक कीमतों में भी उतार-चढ़ाव तेज हो सकता है।
फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि ईरान ने होर्मुज को फिर से खोलने के लिए शर्तें रखी हैं। इसलिए आगे की स्थिति संबंधित पक्षों के बीच बातचीत और उन शर्तों पर होने वाली प्रगति पर निर्भर करेगी। उपलब्ध रिपोर्ट में ईरान की सातों शर्तों का पूरा विवरण सार्वजनिक रूप से नहीं दिया गया है, इसलिए उनके बारे में अपुष्ट दावे करना उचित नहीं होगा।
नोट: यह रिपोर्ट उपलब्ध विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर तैयार की गई है। घटनाक्रम तेजी से बदल सकता है और आगे की आधिकारिक घोषणाओं के साथ स्थिति में बदलाव संभव है।