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मायावती ने आकाश आनंद को BSP से किया बाहर, अशोक सिद्धार्थ के संन्यास के बाद भी नहीं मिली राहत

संपादक: Arvind Kumar Sahani |प्रकाशित: 10 सितम्बर 2026, 03:13 अपराह्न
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लखनऊ, 10 सितंबर 2026: बहुजन समाज पार्टी (BSP) में गुरुवार को बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया। पार्टी प्रमुख मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को संगठन से पूरी तरह अलग कर दिया। यह फैसला उनके ससुर और पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा के कुछ ही समय बाद आया।

आकाश आनंद को इससे पहले 3 सितंबर को BSP के राष्ट्रीय समन्वयक पद से हटाया गया था। इसके बाद 9 सितंबर को मायावती ने कहा था कि यदि अशोक सिद्धार्थ सक्रिय राजनीति से पूरी तरह हटते हैं तो आकाश आनंद की पहले दी गई जिम्मेदारियों को बहाल करने पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जा सकता है।

अशोक सिद्धार्थ ने 10 सितंबर को राजनीति और सामाजिक जीवन से संन्यास की घोषणा कर दी। उन्होंने कहा कि मायावती का आदेश उनके लिए सबसे ऊपर है और BSP तथा बहुजन आंदोलन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने यह भी कहा कि उन पर आकाश आनंद को प्रभावित करने या पार्टी हितों के खिलाफ काम करने के आरोपों में सच्चाई नहीं है।

संन्यास के बाद भी आकाश आनंद को नहीं मिली वापसी

अशोक सिद्धार्थ के राजनीतिक संन्यास के बाद आकाश आनंद की BSP में वापसी की उम्मीद बनी थी, लेकिन मायावती के ताजा फैसले ने तस्वीर बदल दी। विभिन्न रिपोर्टों के मुताबिक मायावती ने आकाश आनंद को पार्टी से पूरी तरह मुक्त करने की बात कही और उनके रुख को पार्टी हितों के अनुरूप नहीं माना।

इस घटनाक्रम से यह साफ है कि BSP में नेतृत्व और संगठन को लेकर अंदरूनी खींचतान अभी खत्म नहीं हुई है। आकाश आनंद को पहले भी पार्टी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिली थीं और उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर कई बार बदलाव हुए हैं। अब ताजा फैसले के बाद 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले BSP की रणनीति और नेतृत्व संरचना पर नजर रहेगी।

मायावती ने परिवार और पार्टी हित के बीच खींची रेखा

मायावती ने हालिया बयानों में पार्टी संगठन को व्यक्तिगत और पारिवारिक हितों से ऊपर रखने पर जोर दिया है। उनका ताजा कदम इसी राजनीतिक रुख की निरंतरता के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, आकाश आनंद की ओर से इस नए फैसले पर आगे क्या राजनीतिक प्रतिक्रिया आती है, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

अशोक सिद्धार्थ ने अपने बयान में कहा कि उन्होंने लंबे समय तक BSP के मिशन के लिए काम किया और पार्टी प्रमुख के निर्देश को स्वीकार करते हुए सक्रिय राजनीति छोड़ने का फैसला लिया। उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को भी खारिज किया।

2027 चुनाव से पहले BSP के लिए अहम घटनाक्रम

उत्तर प्रदेश में 2027 का विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ BSP के संगठनात्मक फैसलों का राजनीतिक महत्व बढ़ गया है। पार्टी दलित मतदाताओं के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने और संगठन को चुनावी स्तर पर सक्रिय करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में आकाश आनंद से जुड़ा यह फैसला BSP के भविष्य के नेतृत्व और चुनावी रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

जरूरी स्पष्टता: आकाश आनंद या अशोक सिद्धार्थ के खिलाफ लगाए गए राजनीतिक आरोपों को यहां स्थापित तथ्य के रूप में नहीं प्रस्तुत किया गया है। रिपोर्ट में केवल संबंधित नेताओं और विश्वसनीय समाचार रिपोर्टों में बताए गए दावों और फैसलों को अलग-अलग रूप में रखा गया है।

स्रोत: 10 सितंबर 2026 की Indian Express, PTI/Rediff और New Indian Express की रिपोर्टों से घटनाक्रम और प्रमुख तथ्य क्रॉस-चेक किए गए।